जयपुर, 24 अगस्त।
राजस्थान में आगामी नगर निकाय और पंचायती राज चुनाव को देखते हुए पुलिस ने मतदाताओं, प्रत्याशियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों के लिए साइबर सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने फर्जी वोटर लिंक, ओटीपी, क्यूआर कोड, फिशिंग ई-मेल और डीपफेक वीडियो के जरिए होने वाली ठगी से सतर्क रहने की अपील की है।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक साइबर क्राइम एवं तकनीकी सेवाएं वीके सिंह ने बताया कि साइबर ठग वाट्सएप और एसएमएस के माध्यम से ‘वोटर लिस्ट में नाम देखें’ या ‘पोलिंग बूथ बदल गया है’ जैसे संदेश भेज सकते हैं। इन संदेशों के जरिए लोगों को फर्जी लिंक पर क्लिक करवाकर ठगी की कोशिश की जा सकती है। मतदाता सूची और मतदान से जुड़ी जानकारी के लिए केवल अधिकृत सरकारी वेबसाइट का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
पुलिस ने चेतावनी दी है कि चुनाव अधिकारी बनकर फोन करने वाले किसी व्यक्ति को वोटर कार्ड अपडेट, सत्यापन या किसी अन्य प्रक्रिया के नाम पर ओटीपी, बैंक विवरण, यूपीआई पिन अथवा निजी जानकारी न दें। चुनाव प्रचार और चंदे के नाम पर भेजे गए क्यूआर कोड व यूपीआई लिंक की भी जांच करने को कहा गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि पैसा प्राप्त करने के लिए यूपीआई पिन डालने की जरूरत नहीं होती।
चुनाव के दौरान नेताओं के नाम पर फर्जी वीडियो, ऑडियो, भाषण और डीपफेक सामग्री सोशल मीडिया पर प्रसारित होने की आशंका भी जताई गई है। पुलिस ने बिना आधिकारिक पुष्टि के ऐसी सामग्री पर भरोसा नहीं करने और उसे आगे प्रसारित न करने की अपील की है। प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया खातों पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन सक्रिय करने तथा मजबूत पासवर्ड रखने की सलाह दी गई है।
पुलिस ने वाट्सएप समूहों के संचालकों को केवल भरोसेमंद सदस्यों को संदेश भेजने की अनुमति देने और आवश्यकता के अनुसार ‘सिर्फ एडमिन’ सेटिंग का उपयोग करने को कहा है। चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को संवेदनशील चुनावी डेटा या ईवीएम-वीवीपैट से जुड़ी जानकारी निजी उपकरणों और सार्वजनिक वाई-फाई पर साझा नहीं करने की हिदायत दी गई है।















