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मध्य प्रदेश
25 Aug, 2026

चंदेरी में पोर्टल पर चल रहे स्कूलों की हकीकत पर सवाल, आरटीई व्यवस्था जांच के घेरे में

चंदेरी में आरटीई प्रवेश को लेकर मिली शिकायत के बाद शिक्षा विभाग के पोर्टल पर दर्ज विद्यालयों की वास्तविक स्थिति और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।

चंदेरी, 25 अगस्त।

मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के चंदेरी में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर एक शिकायत सामने आई है, जिसने शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनसुनवाई में आवेदक राघवेंद्र चौबे ने शिकायत की कि कुछ ऐसे विद्यालय भी शिक्षा विभाग के पोर्टल पर संचालित बताए जा रहे हैं, जो वास्तविक रूप से मौके पर मौजूद नहीं हैं। आवेदक ने अपनी बच्ची के आरटीई के तहत प्रवेश के लिए आवेदन किया था, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए चंदेरी एसडीएम मनीष धनगर ने संबंधित विद्यालय संचालक को जनसुनवाई में उपस्थित होकर पक्ष रखने के निर्देश दिए। हालांकि, नोटिस जारी होने के बाद भी संबंधित संचालक जनसुनवाई में नहीं पहुंचे। इस पर एसडीएम ने मौके पर मौजूद बीआरसी प्रतिनिधि को फटकार लगाई और विद्यालय के वास्तविक संचालन तथा पोर्टल पर दर्ज जानकारी की जांच कर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए।

एसडीएम ने मामले में संबंधित विद्यालय संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई किए जाने की बात कही है। इसके बाद मामला केवल एक बच्ची के आरटीई प्रवेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यालयों के पंजीयन, भौतिक सत्यापन, विभागीय रिकॉर्ड और पोर्टल पर दर्ज जानकारियों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

पोर्टल पर दर्ज विद्यालयों के सत्यापन पर सवाल

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई विद्यालय वास्तव में संचालित नहीं है तो वह शिक्षा विभाग के पोर्टल पर दर्ज कैसे हो गया। विद्यालय को मान्यता, पंजीयन और आरटीई प्रक्रिया में शामिल करने से पहले उसका भौतिक सत्यापन किस अधिकारी या कर्मचारी ने किया, इसकी जांच भी जरूरी हो गई है।

यदि विद्यालय का सत्यापन किया गया था तो मौके पर विद्यालय उपलब्ध नहीं होने के बावजूद उसे पोर्टल पर संचालित कैसे दर्शाया गया, यह भी जांच का विषय है। खंड स्तर से लेकर जिला स्तर तक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी विद्यालयों की स्थिति, रिकॉर्ड और योजनाओं के संचालन की निगरानी से जुड़ी होती है। ऐसे में शिकायत सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

क्या चंदेरी में और भी ऐसे विद्यालय हैं?

राघवेंद्र चौबे की शिकायत के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या चंदेरी में केवल एक ही ऐसा विद्यालय है, जो पोर्टल पर संचालित दिख रहा है लेकिन जमीन पर मौजूद नहीं है। या फिर क्षेत्र में ऐसे अन्य विद्यालय भी हैं, जिनकी वास्तविक स्थिति और पोर्टल पर दर्ज जानकारी में अंतर है।

मामले की विस्तृत जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरटीई पोर्टल पर दर्ज कितने विद्यालय वास्तव में संचालित हैं, कितने विद्यालयों में निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध हैं और कितने विद्यालयों का हाल के समय में वास्तविक सत्यापन किया गया है।

बीआरसीसी की अनुपस्थिति पर कलेक्टर को भेजा प्रतिवेदन

इसी जनसुनवाई के दौरान चंदेरी के बीआरसीसी की अनुपस्थिति का मामला भी सामने आया। चंदेरी एसडीएम ने 25 अगस्त 2026 को अशोकनगर कलेक्टर को भेजे पत्र में बताया कि शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक मंगलवार को खंड स्तर पर जनसुनवाई आयोजित की जाती है। इसके बाद विभिन्न शासकीय योजनाओं की समीक्षा भी की जाती है।

पत्र में बताया गया कि 25 अगस्त को आयोजित जनसुनवाई में बीआरसीसी चंदेरी वेद प्रकाश गोयल बिना सूचना अनुपस्थित रहे। उनकी अनुपस्थिति के कारण शिक्षा विभाग से जुड़ी शिकायतों का समाधान नहीं हो सका और विभागीय योजनाओं की समीक्षा भी प्रभावित हुई।

एसडीएम ने कलेक्टर को भेजे प्रतिवेदन में बीआरसीसी की अनुपस्थिति का उल्लेख करते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की है।

जांच के बाद सामने आएगी स्थिति

पूरे मामले के बाद चंदेरी में शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि आरटीई पोर्टल पर विद्यालयों की जानकारी कौन दर्ज करता है, उनका भौतिक सत्यापन कब और किसके द्वारा किया गया और यदि कोई विद्यालय मौके पर संचालित नहीं था तो उसे पोर्टल पर स्थान कैसे मिला।

इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि ऐसे विद्यालयों में आरटीई के तहत कितने बच्चों ने प्रवेश के लिए आवेदन किया और कितने बच्चों को प्रवेश दिया गया।

आवेदक की शिकायत अब केवल उनकी बच्ची के प्रवेश तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ा मामला बन गया है। ऐसे में चंदेरी क्षेत्र के आरटीई पोर्टल पर दर्ज सभी विद्यालयों का मौके पर जाकर स्वतंत्र भौतिक सत्यापन कराने की आवश्यकता सामने आई है।

यदि जांच में गलत जानकारी दर्ज करने, विद्यालय के नियम विरुद्ध संचालन या अन्य अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो संबंधित विद्यालय संचालक के साथ जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी तय की जानी चाहिए।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि विद्यालय जमीन पर मौजूद नहीं है तो वह शिक्षा विभाग के पोर्टल पर संचालित कैसे दर्ज हुआ और निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई।

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