कैनबरा, 25 अगस्त।
ऑस्ट्रेलिया की संघीय अदालत के एक फैसले से भारतीय बासमती चावल निर्यातकों को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने ऑस्ट्रेलिया में बासमती चावल के लिए विशेष प्रमाणन ट्रेडमार्क हासिल करने की भारत की अपील को खारिज कर दिया है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर पंजाब और हरियाणा के निर्यातकों पर पड़ने की संभावना है।
पंजाब देश के कुल बासमती निर्यात में करीब 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दोनों राज्यों के निर्यातक विदेशी बाजारों में कारोबार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
बासमती निर्यातकों के अनुसार, इस निर्णय के बाद ऑस्ट्रेलियाई बाजार में भारतीय निर्यातकों को पाकिस्तान के निर्यातकों से सीधी प्रतिस्पर्धा करनी होगी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि बासमती चावल केवल भारत की विशेष संपत्ति नहीं है, बल्कि यह भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के सिंधु-गंगा मैदानी क्षेत्रों में उगाई जाने वाली पारंपरिक फसल है।
ऑस्ट्रेलिया में फिलहाल भारतीय बासमती का दबदबा है। भारतीय बासमती का कारोबार करीब 380 मिलियन डॉलर का है, जबकि पाकिस्तान का निर्यात लगभग 44.12 मिलियन डॉलर है। अब कम कीमतों के आधार पर पाकिस्तान भारतीय बाजार हिस्सेदारी को चुनौती दे सकता है।
इस फैसले का असर अन्य विदेशी बाजारों पर भी पड़ सकता है। ऑस्ट्रेलिया की कानूनी व्यवस्था को कई देशों में महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में पाकिस्तान इस फैसले का हवाला देकर यूरोपीय संघ, न्यूजीलैंड और केन्या जैसे बाजारों में अपने दावों को मजबूत कर सकता है।
भारतीय निर्यातकों को ऑस्ट्रेलिया में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए कीमतों में कमी करनी पड़ सकती है, जिससे उनके मुनाफे पर असर पड़ने की संभावना है।
बासमती शब्द प्रमाणित एपीडा चावल और अन्य बासमती चावल के बीच अंतर नहीं करता है। अदालत ने ऑस्ट्रेलिया के ट्रेड मार्क्स एक्ट 1995 की धारा 177(2) के प्रावधानों के आधार पर फैसला सुनाया। यह प्रावधान तय करता है कि कोई प्रमाणन चिह्न प्रमाणित उत्पादों को गैर-प्रमाणित उत्पादों से अलग पहचान देने में सक्षम है या नहीं।
एपीडा ने वर्ष 2019 में ऑस्ट्रेलिया में बासमती के लिए ट्रेडमार्क आवेदन किया था। इसमें बताया गया था कि 1988 से 2018 के बीच ऑस्ट्रेलियाई बाजार में भारतीय बासमती की मजबूत मौजूदगी रही है। ऑस्ट्रेलियाई खुदरा दुकानों में बिकने वाले भारतीय बासमती की मात्रा करीब 3,06,095 टन अनुमानित थी, जिसकी कीमत 380 मिलियन डॉलर थी। वहीं पाकिस्तान से बासमती की बिक्री लगभग 44.12 मिलियन डॉलर रही थी।















