भोपाल, 25 अगस्त।
आज बैंकिंग, यूपीआई, शॉपिंग, केवाईसी और संवाद सब डिजिटल हो गए हैं। सुविधा बढ़ी तो साइबर अपराध भी तेजी से बढ़े हैं। बैंक ऑफ इंडिया, भोपाल के प्रमुख अवेयरनेस एक्सपर्ट और सेंट्रल जोन के मैनेजर आशीष बंसल ने कहा कि अब तकनीकी हैकिंग के बजाय साइबर अपराधी डर, लालच और भरोसे का फायदा उठाते हैं। साइबर अपराधियों ने लोगों को ठगने के नए तरीके अपना लिए हैं। जागरूकता ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार है। आज लगभग हर काम ऑनलाइन है। अपराधी लोगों की जल्दबाजी और भरोसे का फायदा उठाकर फेक केवाईसी, यूपीआई फ्रॉड, क्यूआर स्कैन, फिशिंग लिंक और डीपफेक जैसे तरीके अपना रहे हैं। एक क्लिक में पैसा गायब हो सकता है। इसलिए सतर्कता बहुत जरूरी है।
ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन, सीवीवी और पासवर्ड कभी शेयर न करें। पैसा प्राप्त करने के लिए यूपीआई पिन नहीं लगता। क्यूआर स्कैन करने से पहले लेनदेन की पुष्टि करें और हमेशा आधिकारिक वेबसाइट या एप का ही इस्तेमाल करें। गूगल से नंबर सर्च न करें। शाखा या आधिकारिक वेबसाइट और एप से कस्टमर केयर नंबर की पुष्टि कर उसे सेव करें। केवाईसी बंद होने या खाता फ्रीज होने जैसी कॉल आए तो तुरंत काट दें और खुद बैंक की शाखा या आधिकारिक नंबर पर संपर्क करें। ओटीपी और पिन किसी को न बताएं।
आरबीआई ने बैंकों को 31 अक्टूबर 2025 तक अपने डोमेन को डॉट बैंक डॉट इन में बदलने का निर्देश दिया था। इससे फर्जी वेबसाइट की पहचान आसान हुई है। वेबसाइट का यूआरएल ध्यान से देखें और असली डोमेन ही खोलें। एनीडेस्क और टीमव्यूअर जैसे एप के जरिए बैंक की जानकारी चोरी की जा सकती है। अज्ञात व्यक्ति के कहने पर ऐसे एप कभी इंस्टॉल न करें। अनजान लिंक पर क्लिक न करें और फोन को रिमोट से एक्सेस न करने दें। अज्ञात लिंक या एपीके में वायरस हो सकता है। इससे आपका डेटा चोरी और बैंक खाता खाली हो सकता है। केवल आधिकारिक स्टोर से ही एप डाउनलोड करें।
ठग पुलिस, सीबीआई और ईडी बनकर धमकाते हैं। डरकर पैसा ट्रांसफर न करें। पहचान की स्वतंत्र पुष्टि करें और तुरंत 1930 पर कॉल करें। ठगी होने पर सबसे पहले तुरंत 1930 पर कॉल करें। इसके साथ ही साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करें, बैंक को सूचित करें और सबूत संभालकर रखें।
बैंकिंग संबंधी शिकायत में पहले बैंक में शिकायत करें। समाधान न हो तो आरबीआई के 14448 नंबर पर शिकायत करें। परिवार और जेन-जी की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। परिवार व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर नियमित बात करें। कोई संदिग्ध कॉल आए तो जरूर पूछें। युवाओं को चाहिए कि वे अपने माता-पिता और बुजुर्गों को साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूक करें। अपील है कि आप पांच लोगों को साइबर सुरक्षा के बारे में जरूर बताएं।
साइबर सुरक्षा केवल बैंक की जिम्मेदारी नहीं है, यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है। तकनीक का उपयोग सावधानी से करें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले सोचें और किसी भी दबाव में आकर पैसा ट्रांसफर न करें। यदि सभी लोग थोड़ी-सी सतर्कता बरतें तो साइबर ठगी के मामलों में बड़ी कमी आ सकती है और हमारा पैसा और डेटा सुरक्षित रह सकता है।















