वाशिंगटन, 25 अगस्त।
अमेरिका ने ईरानी पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात से जुड़े मामले में चार भारतीय कंपनियों और तीन भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी प्रशासन ने यह कार्रवाई ईरान के आर्थिक नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने के अभियान के तहत की है।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, भारतीय कंपनी सदाशिवा ओवरसीज लिमिटेड ने फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच करीब 69 मिलियन डॉलर मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। इसमें पहले से प्रतिबंधित कंपनी बोनजोर कमोडिटी एफजेडई से जुड़ी आपूर्ति भी शामिल थी।
इसके अलावा पीपी सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड और प्रकृति इन्फ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पर भी ईरानी उत्पादों के आयात का आरोप लगाया गया है। इन दोनों कंपनियों ने करीब 25-25 मिलियन डॉलर मूल्य के उत्पादों का आयात किया। तीनों कंपनियों से जुड़े आयात का कुल मूल्य लगभग 119 मिलियन डॉलर बताया गया है।
अमेरिका ने भारत स्थित सीमा शुल्क सेवा प्रदाता पोर्टीज पार्टनर्स एलएलपी पर भी प्रतिबंध लगाया है। उस पर ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कई खेप भारत पहुंचाने में सहायता करने का आरोप लगाया गया है।
इसके साथ ही कंपनी के नामित साझेदार इंद्रिस्मिया अशरफमिया शेख और हरीश रामचंद्र रंगी तथा पीपी सॉफ्टटेक के निदेशक प्रशांत गर्ग को भी प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया है।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने इन प्रतिबंधों को ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ अभियान का हिस्सा बताया है। इसके तहत ईरान की अर्थव्यवस्था को समर्थन देने वाले व्यक्तियों, कंपनियों और जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
अमेरिकी प्रतिबंधों का दायरा चीन की कंपनियों और नागरिकों तक भी बढ़ाया गया है। मुख्य भूमि चीन और हांगकांग की कम से कम 20 कंपनियों तथा चार चीनी नागरिकों पर ईरान के तेल व्यापार और संवेदनशील तकनीकी उपकरणों की खरीद से जुड़े नेटवर्क में कथित भूमिका को लेकर कार्रवाई की गई है।
प्रतिबंधित चीनी संस्थाओं में शेनझेन स्वीट ओशन टेक्नोलॉजी लिमिटेड, शेनझेन हुआमेई लियानयुन इंटरनेशनल लॉजिस्टिक्स कंपनी लिमिटेड, शेनझेन बोसितोंग लॉजिस्टिक्स कंपनी लिमिटेड, बोसितोंग सप्लाई चेन शेनझेन कंपनी लिमिटेड और लिलीमून नेविगेशन इंक शामिल हैं।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने बताया कि कुछ चीनी कंपनियों और लोगों पर ईरान के लिए संवेदनशील उपकरणों की खरीद, वित्तीय लेनदेन और लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने के आरोप हैं।
इसके अलावा लिलीमून नेविगेशन इंक और हांगकांग की वियना शिपिंग व रिकीजा ग्रुप से जुड़े मामलों में ईरानी पेट्रोलियम परिवहन करने वाले जहाजों पर भी कार्रवाई की गई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, कुछ जहाजों ने वर्ष 2026 में ईरानी तेल की बड़ी मात्रा चीन तक पहुंचाई थी।















