कनाडा, 25 अगस्त।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि अमेरिकी वार्ताकारों के लिए फ्रेंच भाषा भले ही एक परेशानी का मुद्दा हो, लेकिन क्यूबेक में यह लोगों के अधिकारों से जुड़ा विषय है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब कार्नी को अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को ठुकराने के फैसले के लिए देश के कई राजनीतिक नेताओं से समर्थन मिला है। नेताओं का मानना था कि यह समझौता कनाडा की फ्रेंच भाषी संस्कृति को कमजोर कर सकता था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस विवाद पर पीछे हटने के संकेत नहीं दिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि कनाडा वर्षों से अमेरिका का आर्थिक नुकसान कर रहा है और कारों, ट्रकों सहित कई क्षेत्रों पर नए भारी शुल्क लगाने की चेतावनी दी। इससे दोनों देशों के बीच चल रहा व्यापार विवाद और गहरा गया है।
कार्नी ने पिछले सप्ताह अपने वार्ताकारों को अमेरिका के साथ चल रही बातचीत छोड़ने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सप्ताहांत से कई कनाडाई उत्पादों पर शुल्क लागू हो गया, जिसका असर कनाडा के अमेरिका को होने वाले करीब 5 प्रतिशत निर्यात पर पड़ा है। कनाडा ने कहा है कि वह सितंबर की शुरुआत में इसका जवाब देगा।
सोमवार को क्यूबेक के मुख्यमंत्री के साथ एक जहाज निर्माण केंद्र का दौरा करते हुए कार्नी ने कहा कि कनाडा ऐसा कोई समझौता स्वीकार नहीं कर सकता, जिससे फ्रेंच भाषा संरक्षण कमजोर हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार अमेरिका की मांगों को पूरा नहीं करेगी।
अमेरिका के साथ बातचीत खत्म करने के फैसले के बाद कनाडा में कई राजनीतिक नेताओं और विशेषज्ञों ने कहा कि दोनों पुराने सहयोगी अब आर्थिक टकराव की स्थिति में पहुंच गए हैं। क्यूबेक, जो कनाडा का प्रमुख फ्रेंच भाषी प्रांत है, लंबे समय से अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए प्रयास करता रहा है।
क्यूबेक के नियमों को लेकर अमेरिकी वार्ताकार पहले भी आपत्ति जता चुके हैं। वहां के कानूनों के तहत राज्य में बिकने वाले उत्पादों पर फ्रेंच भाषा में जानकारी देना जरूरी है। इसके अलावा डिजिटल सेवाओं से जुड़ी कंपनियों को भी फ्रेंच सामग्री को बढ़ावा देने के नियमों का पालन करना पड़ता है।
क्यूबेक की मुख्यमंत्री क्रिस्टीन फ्रेचेत्ते ने कहा कि कार्नी का फैसला सही था। उन्होंने कहा कि भाषा और संस्कृति वहां के लोगों की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इन्हें व्यापार वार्ता का विषय नहीं बनाया जा सकता।
इस बीच सर्वेक्षणों में सामने आया है कि ट्रंप के प्रति सबसे अधिक नाराजगी क्यूबेक में है। अमेरिका के साथ बढ़ते आर्थिक तनाव के कारण वहां अलग देश बनाने की मांग करने वाले समूहों के समर्थन में भी गिरावट देखी गई है।
क्यूबेक के अलगाववादी नेता पॉल सेंट-पियरे प्लामोंडॉन ने कहा कि प्रांत की राजनीतिक स्थिति पर फैसला अमेरिका की मौजूदा राजनीति या ट्रंप के कार्यकाल से प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने संभावित जनमत संग्रह को ट्रंप के पद से हटने तक टालने की बात कही।
क्यूबेक के वाणिज्य मंडल महासंघ ने अमेरिकी शुल्क को कारोबार के लिए सबसे खराब स्थिति बताया। फ्रेचेत्ते ने कहा कि इस व्यापार विवाद का सबसे ज्यादा असर क्यूबेक पर पड़ा है और कई क्षेत्रों के व्यवसायों को नुकसान का खतरा है।
अमेरिका के शीर्ष व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने फ्रेंच भाषा संरक्षण को लेकर चल रही चर्चाओं को गलत बताया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा भाषा से जुड़ा नहीं है, बल्कि अमेरिकी कंपनियों से कनाडाई सामग्री के लिए योगदान लेने से जुड़ा है।
ग्रीर ने कहा कि वह क्यूबेक के लोगों और उनकी फ्रेंच भाषा का सम्मान करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देशों को अपनी राष्ट्रीय पहचान और संस्कृति को प्राथमिकता देने का अधिकार है।
कार्नी ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला मजाक का विषय नहीं है और दोनों पक्षों की सोच में बड़ा अंतर है।
उधर, ट्रंप ने कनाडा के खिलाफ अपना रुख और सख्त कर दिया। उन्होंने कहा कि कनाडा लंबे समय से अमेरिका का फायदा उठा रहा है और अमेरिकी किसानों पर लगाए गए शुल्क स्वीकार नहीं किए जा सकते। उन्होंने 1 जनवरी से कार, ट्रक, वाहन के पुर्जों और स्टील पर नए शुल्क बढ़ाने की चेतावनी दी।
इस कदम के बाद कनाडा के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। ओंटारियो के मुख्यमंत्री डग फोर्ड ने ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा कि कनाडा को हर संभव कदम उठाना चाहिए। उन्होंने ट्रंप को अहंकारी बताते हुए कहा कि किसी दबाव के आगे झुकना उचित नहीं होगा।















