नई दिल्ली, 26 अगस्त।
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने गुरुग्राम में जलभराव, ट्रैफिक जाम, सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर हरियाणा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने शहर की समस्याओं के समाधान के लिए सीएजी जांच कराने और जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
कांग्रेस मुख्यालय में बुधवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए हुड्डा ने कहा कि कभी मिलेनियम सिटी के नाम से पहचान रखने वाला गुरुग्राम आज जलभराव और यातायात जाम जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
हुड्डा ने गुरुग्राम सांसद राव इंद्रजीत सिंह पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले कई वर्षों से शहर की ड्रेनेज व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि बीते दो वर्षों में जलभराव से जुड़ी घटनाओं में 12 लोगों की मौत हुई है।
उन्होंने कहा कि सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था के लिए बजट उपलब्ध होने के बावजूद जमीन पर सुधार नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने जलभराव और ट्रैफिक जाम के दौरान सहायता के लिए बनाए गए कॉल सेंटर की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
कांग्रेस सांसद ने 7 अगस्त को दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के साथ हुई बैठक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बैठक में हरियाणा के सांसदों को बाढ़ और जल शक्ति से जुड़ी समस्याएं रखने के लिए बुलाया गया था, जिसमें गुरुग्राम सांसद शामिल नहीं हुए।
हुड्डा ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बाढ़ संबंधी बयान पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि जब गुरुग्राम के लोग जलभराव और जाम से परेशान हैं, तब सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस सरकार के समय गुरुग्राम में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान कई बड़ी कंपनियां आईं, मेट्रो विस्तार की दिशा में काम हुआ, गुरुग्राम-फरीदाबाद सड़क और गुरुग्राम विश्वविद्यालय जैसी परियोजनाएं आगे बढ़ीं।
हुड्डा ने कहा कि गुरुग्राम से बड़े स्तर पर राजस्व और जीएसटी संग्रह होता है, इसलिए शहर के बुनियादी ढांचे के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। उन्होंने गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण, नगर निगम गुरुग्राम और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की भूमिका तय करने की मांग की।
उन्होंने गुरुग्राम में मेट्रो विस्तार को जरूरी बताते हुए केंद्र सरकार से शहर की आधारभूत समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने की मांग की।















