एक स्थानीय निकाय की बैठक में संवैधानिक पद पर बैठे माननीय ने प्रशासनिक मुखिया को खूब खरी-खोटी सुनाई। साहब शांत रहे और नियमों का हवाला देते रहे। अब यदि साहब ने सच में नियम लागू कर दिए तो माननीय की कई ऐसी सुविधाओं पर कैंची चल सकती है, जो नियमों की किताब में कहीं दिखाई ही नहीं देतीं।















