काठमांडू, 26 अगस्त।
नेपाल की पौराणिक और सांस्कृतिक पहचान वाली बरुण नदी पर पनबिजली परियोजना के प्रस्ताव को लेकर तीखा विरोध शुरू हो गया है। संखुवासभा और खांदवारी की जिला समन्वय समिति ने देश के प्रधानमंत्री व मंत्रिपरिषद कार्यालय को खत लिखकर इस नदी पर जलविद्युत निर्माण न किए जाने की पुरजोर मांग की है। यह प्रस्तावित 132 मेगावाट की लोअर बरुण खोला परियोजना मकालू-बरुण राष्ट्रीय निकुंज और संरक्षण क्षेत्र के भीतर भोटखोला गाउंपालिका के स्याक्सिला में निर्धारित है।
समिति के प्रमुख सुमन शाक्य का कहना है कि यह नदी लोगों की धार्मिक भावनाओं का प्रमुख केंद्र है और इसका अस्तित्व बचाना बेहद जरूरी है। इससे पहले स्थानीय गाउंपालिका की कार्यपालिका बैठक में भी बरुण नदी को धार्मिक धरोहर के रूप में सुरक्षित रखने और इस क्षेत्र में बिजली संयंत्र के निर्माण पर रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है।
रिपोर्ट के अनुसार संखुवासभा इलाके में अन्य नदियों से भी बड़ी मात्रा में ऊर्जा उत्पादन की क्षमता मौजूद है और अरुण नदी पर पहले से ही काम चल रहा है। इस नदी पर परियोजना लगने से पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति के नष्ट होने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि हिंदू और बौद्ध दोनों समुदायों की इससे गहरी आस्था जुड़ी हुई है।
इस जलधारा के किनारे हर साल माघ महीने के पहले दिन मकर मेला आयोजित होता है जो पहाड़ी और निचले इलाकों के लोगों को आपस में जोड़ता है। स्थानीय जनता और समितियां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम व अन्य कानूनी प्रावधानों का हवाला देकर इस परियोजना को तुरंत रद्द करने की मांग कर रही हैं ताकि नदी का प्राकृतिक रूप सुरक्षित रह सके।















