मैहर, 26 अगस्त।
मध्य प्रदेश के मैहर स्थित मां शारदा देवी धाम की व्यवस्थाओं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता की मांग उठ रही है। लोगों ने मंदिर से जुड़े आदेशों, कर्मचारियों की तैनाती और ड्यूटी रोस्टर की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ कर्मचारी लंबे समय से महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं से जुड़े पदों पर बने हुए हैं, वहीं कुछ कर्मचारियों के कार्यस्थल में समय-समय पर बदलाव किया जाता है। मंदिर की अनुकूट और सार्वजनिक यात्री भोजन व्यवस्था से जुड़े कुछ प्रभारियों की लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
कुछ स्थानीय लोगों ने प्रभारी सीबी पटेल और सुरभान तिवारी की भूमिका को लेकर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित कर्मचारियों का पक्ष सामने नहीं आया है।
राशन सामग्री के उपयोग को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, दर्शनार्थियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली राशन सामग्री के पूर्ण उपयोग को लेकर संदेह जताया गया है। साथ ही अधिकारियों की आवभगत के नाम पर प्रतिमाह करीब 50 हजार रुपये की सामग्री निजी स्थानों पर भेजे जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है और वास्तविक स्थिति दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मां शारदा देवी धाम लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में मंदिर में दान सामग्री, राशन, कर्मचारियों की ड्यूटी, भोजन व्यवस्था और अन्य संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता जरूरी है।
मंदिर परिसर में सुरक्षा और निगरानी के लिए बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि इतनी व्यापक निगरानी व्यवस्था के बावजूद व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं। लोगों ने मंदिर की व्यवस्था में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों ने मंदिर की ड्यूटी रोस्टर, कर्मचारियों की तैनाती, राशन खरीदी और वितरण, अनुकूट व्यवस्था, दान सामग्री तथा अन्य संसाधनों के उपयोग की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।
मंदिर प्रशासन और संबंधित कर्मचारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल मंदिर व्यवस्थाओं में पारदर्शिता को लेकर स्थानीय स्तर पर मांग तेज हो गई है।















