भोपाल, 26 अगस्त।
भोपाल में मानसून के फिर सक्रिय होने से तेज बारिश का दौर जारी है। बारिश और खराब यातायात प्रबंधन के कारण राजधानी में जनजीवन प्रभावित हो रहा है। सोमवार को भारत टॉकीज से रेलवे स्टेशन मार्ग पर घंटों जाम लगा रहा। जबलपुर, सागर, इंदौर और नागपुर की ओर से आने वाले वाहनों का दबाव, बदहाल सड़कें और बारिश मिलकर शहर को जाम के महाकुंभ में बदल देते हैं। तस्वीर में कारें, बसें, ऑटो और ट्रक एक साथ फंसे नजर आते हैं। लोग घंटों रेंगने को मजबूर हैं। सवाल यही है कि इसका जिम्मेदार कौन है - पुलिस, यातायात, जिला प्रशासन, परिवहन विभाग या आम आदमी?
ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी है कि बारिश में वैकल्पिक मार्ग बनाए और जाम वाले स्थानों पर जवान तैनात करे। लेकिन भारत टॉकीज-रेलवे स्टेशन जैसे व्यस्त मार्ग पर न तो प्रभावी डायवर्जन दिखा और न पर्याप्त यातायात व्यवस्था। सिग्नल बंद रहे और भारी वाहनों के प्रवेश पर भी प्रभावी नियंत्रण नहीं दिखा। शहर में भारी वाहनों के प्रवेश का समय तय होने के बावजूद यदि नियमों का पालन नहीं होता तो ट्रैफिक प्लान कागज तक ही सीमित रह जाता है।
दूसरी ओर, बारिश के बाद सड़कों पर गड्ढे और जलभराव व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। नालियों की सफाई और सड़कों की मरम्मत समय पर नहीं होने से समस्या और बढ़ गई है। भारत टॉकीज से स्टेशन मार्ग पर अतिक्रमण ने भी सड़क को संकरा कर दिया है। ऑटो और ई-रिक्शा के मनमाने संचालन तथा बसों के बीच सड़क पर सवारी उतारने से स्थिति और बिगड़ती है।
आम आदमी की भी कुछ जिम्मेदारी है। रॉन्ग साइड चलना, लेन न मानना और बारिश में तेज वाहन चलाना गलत है। लेकिन जब सड़क, सिग्नल और यातायात प्रबंधन ही दुरुस्त न हो तो सारी जिम्मेदारी जनता पर नहीं डाली जा सकती।
यह जाम केवल बारिश का नतीजा नहीं, बल्कि व्यवस्था की नाकामी है। पुलिस, जिला प्रशासन, नगर निगम और परिवहन विभाग को समन्वय के साथ स्थायी समाधान तलाशना होगा। जनता टैक्स सुविधा के लिए देती है, रोजाना जाम के महाकुंभ में फंसने के लिए नहीं।














