तूतीकोरिन, 27 अगस्त।
दक्षिण भारत में वैदिक परंपरा से जुड़ा आवणी अविट्टम पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। तमिल कैलेंडर के अनुसार यह पर्व आवणी महीने में अविट्टम यानी धनिष्ठा नक्षत्र के दिन मनाया जाता है।
इस अवसर पर पुरुष पुराने जनेऊ को बदलकर नया जनेऊ धारण करने की धार्मिक परंपरा निभाते हैं। इस दौरान वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है और ऋषियों व पूर्वजों के प्रति आभार प्रकट करते हुए विशेष पूजा की जाती है।
आवणी अविट्टम को वेदों के पुनर्जन्म दिवस के रूप में भी माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने हयग्रीव अवतार लेकर असुरों से वेदों को वापस प्राप्त किया था और उन्हें फिर से पवित्र किया था। इसी कारण इस दिन को हयग्रीव जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
यह पर्व आत्मचिंतन, प्रायश्चित और आगे आध्यात्मिक परंपराओं को सही तरीके से निभाने के संकल्प का प्रतीक भी माना जाता है।
तूतीकोरिन में तेप्पाकुलम के पास स्थित भजन मंडप में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोगों ने जनेऊ बदलने की रस्म पूरी की। इस दौरान श्रद्धालुओं ने कत्ती खेल का प्रदर्शन किया और कोलाट्टम नृत्य के जरिए उत्सव मनाया।
कुमारपालयम में भी आवणी अविट्टम के मौके पर विभिन्न मंदिरों में विशेष यज्ञ और पूजा-अर्चना आयोजित की गई। साउंडम्मन मंदिर सहित कई स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रम हुए।
सेलम रोड स्थित साउंडम्मन मंदिर में 100 से अधिक वीरकुमारों ने कत्ती खेल प्रस्तुत किया। वहीं छोटी बच्चियों ने कोलाट्टम नृत्य किया। श्रद्धालुओं को प्रसाद और अन्नदान भी वितरित किया गया।















