सीहोर, 28 अगस्त।
रक्षाबंधन के पावन अवसर पर शुक्रवार को सीहोर जिला मुख्यालय के पास स्थित प्रसिद्ध कुबेरेश्वरधाम में श्रद्धा और भक्ति का नजारा देखने को मिला। सुबह से ही हजारों श्रद्धालु धाम पहुंचे। भक्तों ने भगवान कुबेरेश्वर महादेव का मंगल तिलक किया और सीवन नदी के तट से लाए पवित्र जल से विधि-विधानपूर्वक अभिषेक किया। मंदिर परिसर में लगातार हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे।
हर वर्ष की तरह इस बार भी कुबेरेश्वरधाम में सादगी और श्रद्धा के साथ मंगल तिलक महोत्सव हुआ। इस दौरान प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव पर अटूट विश्वास इंसान को कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना करने की ताकत देता है। भोलेनाथ को भव्य आयोजन या महंगे उपहारों की आवश्यकता नहीं, बल्कि प्रेम और श्रद्धा से चढ़ाया गया एक लोटा स्वच्छ जल ही प्रिय है।
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन प्रेम, सुरक्षा, रक्षा और विश्वास का पर्व है। सनातन परंपरा में मनाए जाने वाले पर्व हमारी संस्कृति और परंपराओं की आधारशिला हैं। इनके माध्यम से समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और एकता की भावना मजबूत होती है।
महिलाओं ने बाबा को बांधा रक्षा सूत्र
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में महिलाएं कुबेरेश्वरधाम पहुंचीं और भगवान का मंगल तिलक किया। कई महिलाओं ने बाबा को रक्षा सूत्र भी बांधा और परिवार की सुख-शांति व समृद्धि की प्रार्थना की। श्रद्धालुओं ने सीवन नदी के तट से लाए जल से भगवान शिव का अभिषेक किया।
महिलाओं ने बताया कि कुबेरेश्वरधाम उन्हें मायके जैसा महसूस होता है। यहां आने पर उन्हें अपनापन और आत्मीयता का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की भक्ति का सरल मार्ग उन्हें पंडित प्रदीप मिश्रा के माध्यम से मिला है और इसी श्रद्धा के चलते वे हर वर्ष बाबा के दरबार में पहुंचती हैं।
विठलेश सेवा समिति ने किया श्रद्धालुओं का स्वागत
मंगल तिलक महोत्सव के दौरान विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला सहित विप्रजनों ने श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया।
इस दिन कांवड़ मेले का अंतिम दिवस भी रहा। कांवड़ियों के समूह कंधों पर जल लेकर शिव भक्ति में लीन होकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ते दिखाई दिए। यह सनातन परंपरा की उस निरंतर धारा का प्रतीक नजर आया, जो प्राचीन काल से भारतीय चेतना का हिस्सा रही है। यह समय शिव आराधना के लिए विशेष पवित्र माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण कर सृष्टि को विनाश से बचाया था।
कंकर में शंकर की आस्था
कुबेरेश्वरधाम में पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच कंकर में शंकर की आस्था भी दिखाई दी। भक्तों ने मंदिर परिसर में मौजूद विभिन्न शिव स्वरूपों की श्रद्धापूर्वक पूजा की। रक्षाबंधन पर मुरली मनोहर मंदिर में भगवान शिव-पार्वती, भगवान श्रीराम-माता सीता और भगवान श्रीकृष्ण-राधा के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने पर्व का आनंद लिया।
सुबह से लेकर पूरे दिन धाम में भक्तों की आवाजाही बनी रही। भक्ति, आस्था और रक्षाबंधन के उल्लास के बीच पूरा कुबेरेश्वरधाम शिव भक्ति में डूबा नजर आया।















