काठमांडू, 28 अगस्त।
नेपाल में बाढ़ के खतरे के बीच एक बार फिर त्रिशूली क्षेत्र को खाली कराया जा रहा है। ऊपर से बड़ी मात्रा में पानी आने के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई गई है। इसी के चलते नेपाल पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
इसी बीच शुक्रवार को चीन के सिचुआन प्रांत में 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र के अनुसार भूकंप दक्षिण-पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत के लोंगचांग शहर में आया। इसके बाद नेपाल में भी बाढ़ को लेकर नया अलर्ट जारी किया गया।
नेपाल पुलिस ने बताया कि तिब्बत की ओर एक बांध फिर टूट गया है। पुलिस ने सुरक्षा कर्मियों, राहत एवं बचाव कार्य में जुटे लोगों और आम नागरिकों से तत्काल सतर्क रहने की अपील की है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और आसपास के लोगों को भी इसकी जानकारी देने को कहा गया है।
नेपाल में हाल की भीषण बाढ़ के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है। नेपाल पुलिस के अनुसार शुक्रवार तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 469 पहुंच गई है, जबकि 1,545 लोग घायल हुए हैं और उन्हें बचाया जा चुका है। चितवन में सबसे अधिक 178 शव बरामद हुए हैं। इसके बाद एनपी ईस्ट में 110, गोरखा में 44, नुवाकोट में 37, धादिंग में 33, तनहुन में 28, एनपी वेस्ट में 27 और रसुवा में 12 लोगों की मौत हुई है।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने गुरुवार को बताया था कि बाढ़ के बाद करीब 300 भारतीय पर्यटकों के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। नेपाल पर्यटन बोर्ड के ताजा आंकड़ों के अनुसार अब भी 178 भारतीय नागरिकों का पता नहीं चल पाया है। नेपाल में कुल 826 और तिब्बत में 558 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है।
नेपाल ने विदेशी बचाव दलों की मदद लेने से किया इनकार
नेपाल ने कई देशों की ओर से खोज और बचाव दल भेजने के प्रस्ताव को फिलहाल स्वीकार नहीं किया है। सरकार का कहना है कि देश की सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां राहत एवं बचाव अभियान संभालने में सक्षम हैं।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने बताया कि भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश ने अपने खोज एवं बचाव दल भेजने की पेशकश की थी। हालांकि नेपाल ने फिलहाल अपने घरेलू सुरक्षा बलों के माध्यम से ही अभियान जारी रखने का फैसला किया है।
ग्लेशियर टूटने से आई तबाही
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार ग्लेशियर के टूटने और मलबे के बहाव से भूकंपीय गतिविधि पैदा हुई, जिसका नेपाल और तिब्बत में नीचे की ओर विनाशकारी असर पड़ा। शुरुआती रिपोर्टों में भूकंप को हिमस्खलन और बाढ़ की वजह बताया गया था, लेकिन बाद में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने कहा कि भूकंपीय गतिविधि ग्लेशियर के टूटने के कारण हुई थी।















