नई दिल्ली, 28 अगस्त।
देश में चीनी की एक्स-मिल कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, इसका असर अब खुदरा बाजार में भी दिखाई देने लगा है और आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को चीनी के दाम में और राहत मिल सकती है। सरकार का कहना है कि आपूर्ति शृंखला में कीमतों का असर धीरे-धीरे खुदरा स्तर तक पहुंचता है।
मंत्रालय के मुताबिक, सरकार देशभर में चीनी की कीमतों, उपलब्ध स्टॉक और आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार निगरानी रख रही है। हाल में कीमतों में हुई तेज बढ़ोतरी के बाद कई कदम उठाए गए, जिनका प्रभाव अब बाजार में नजर आ रहा है। एक्स-मिल और खुदरा कीमतों में कमी से संकेत मिला है कि हालिया तेजी के पीछे वास्तविक कमी के बजाय जमाखोरी और सट्टेबाजी की भूमिका रही।
सरकार ने चीनी मिलों में उपलब्ध भंडार का भौतिक सत्यापन भी कराया। इस दौरान कुछ मिलों में घोषित आंकड़ों की तुलना में अधिक चीनी का स्टॉक पाया गया। सत्यापन से यह सामने आया कि देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है। ऐसे में घबराकर खरीदारी करने या जरूरत से ज्यादा भंडारण करने की आवश्यकता नहीं है।
मंत्रालय ने बताया कि कुछ चीनी मिलों द्वारा शॉर्ट सेलिंग की गतिविधियां भी सामने आईं। इसके तहत मासिक कोटे के अनुसार बाजार में जारी की जाने वाली पूरी मात्रा उपलब्ध नहीं कराई जा रही थी। पर्याप्त स्टॉक मौजूद होने के बावजूद आपूर्ति कम होने से बाजार में कृत्रिम कमी की स्थिति बनती है और कीमतों पर दबाव बढ़ता है।
सरकार ने यह भी पाया कि कई मामलों में महीने की शुरुआत में चीनी की बिक्री होने के बावजूद खरीदार मिलों से माल महीने के अंतिम दिनों तक नहीं उठाते थे। इससे बाजार में उपलब्धता प्रभावित होती थी। स्थिति को सुधारने के लिए सितंबर से मासिक कोटे की व्यवस्था के स्थान पर पखवाड़े के आधार पर चीनी आवंटन की नई व्यवस्था लागू की जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत चीनी मिलों को आवंटित कोटे का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा पहले सप्ताह में बाजार के लिए जारी करना होगा। बाकी मात्रा अगले सप्ताह उपलब्ध करानी होगी। इसके साथ ही बिक्री के बाद चीनी को सात दिनों के भीतर मिल परिसर से बाहर भेजना भी अनिवार्य किया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इससे चीनी की आपूर्ति व्यवस्था अधिक तेज और प्रभावी होगी।
पखवाड़ा आधारित आवंटन और सात दिन में आपूर्ति की अनिवार्यता से मिलों से थोक बाजार और फिर उपभोक्ताओं तक चीनी तेजी से पहुंचने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इससे जमाखोरी और सट्टेबाजी की गुंजाइश भी कम होगी। बड़े उपभोक्ताओं को भी उनकी वास्तविक जरूरत से अधिक चीनी का भंडारण नहीं करने की सलाह दी गई है।
मंत्रालय के अनुसार, नया पेराई सत्र 15 अक्टूबर से शुरू होने वाला है। अक्टूबर में ही 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक चीनी उत्पादन होने का अनुमान है। सरकार ने अक्टूबर में तैयार होने वाली चीनी को बिना किसी अतिरिक्त प्रतिबंध के बेचने की अनुमति भी दी है, ताकि नए सत्र का उत्पादन जल्द घरेलू बाजार में पहुंच सके।
नवंबर में करीब 45 लाख मीट्रिक टन चीनी उत्पादन होने का अनुमान है। इससे बाजार में आपूर्ति और मजबूत होने तथा कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलने की संभावना है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है और उपभोक्ताओं को घबराकर अतिरिक्त खरीदारी करने की जरूरत नहीं है। सरकार बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाएगी।















