मालदा, 29 अगस्त।
पश्चिम बंगाल के मालदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में नवजात शिशुओं की मौत के आंकड़ों ने स्वास्थ्य महकमे की नींद उड़ा दी है। इस साल अगस्त माह में ही अब तक तिरासी बच्चे दम तोड़ चुके हैं, जबकि जुलाई में भी सतहत्तर से अधिक मौतें दर्ज की गई थीं।
पिछले वर्षों पर नजर डालें तो अगस्त दो हजार चौबीस में छानबे और दो हजार पच्चीस में सौ बच्चों की मौत हुई थी। हालात का जायजा लेने के लिए स्वास्थ्य भवन, मुर्शिदाबाद और एसएसकेएम अस्पताल के विशेषज्ञों की एक विशेष टीम ने शनिवार को अस्पताल का दौरा किया।
अस्पताल पर मरीजों का भारी दबाव इसकी मुख्य वजह बताई जा रही है क्योंकि बिहार, झारखंड, पड़ोसी जिलों और यहां तक कि बांग्लादेश से भी गंभीर रूप से बीमार बच्चे इलाज के लिए यहां लाए जाते हैं।
अधीक्षक प्रसेनजीत बर ने बताया कि अधिकतर बच्चे बेहद नाजुक हालत में रेफर होकर आते हैं और सीमित संसाधनों के बीच सभी की जान बचाना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।















