मुंबई, 29 अगस्त।
हिंदी सिनेमा की चर्चित फिल्म ‘दिल चाहता है’ ने अपनी रिलीज के 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस खास मौके पर फिल्म की सिल्वर जुबली मनाने के लिए इसकी स्टारकास्ट मुंबई में एकत्र हुई। समारोह में आमिर खान और सैफ अली खान शामिल हुए, हालांकि फिल्म के तीसरे प्रमुख अभिनेता अक्षय खन्ना इस मौके पर नजर नहीं आए।
फरहान अख्तर के निर्देशन में बनी ‘दिल चाहता है’ वर्ष 2001 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर सफल रही थी। फिल्म में आमिर खान, अक्षय खन्ना, सैफ अली खान, प्रीति जिंटा, सोनाली कुलकर्णी और डिंपल कपाड़िया ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई थीं। 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित यह मिलन समारोह फिल्म की यादों को फिर से ताजा करने का अवसर बना।
सैफ अली खान ने इससे पहले निर्देशक के रूप में फरहान अख्तर के काम की जमकर सराहना की थी। उन्होंने फिल्म की शूटिंग के दिनों को याद करते हुए कहा था कि सेट पर अधिकतर समय सभी हंसी-मजाक करते रहते थे, क्योंकि फरहान हर चीज को बेहद सहज और हल्के अंदाज में लेते थे।
सैफ के अनुसार, निर्देशन के दौरान फरहान की सहजता देखकर ऐसा महसूस होता था कि मानो वह इसी काम के लिए बने हों। उन्होंने कहा था कि शूटिंग के दौरान किसी तरह का तनाव नहीं रहता था और पूरी टीम आरामदायक माहौल में काम करती थी।
फिल्म की कहानी तीन दोस्तों आकाश, समीर और सिड के जीवन और उनकी दोस्ती के इर्द-गिर्द बुनी गई है। तीनों अपनी जिंदगी के अलग-अलग दौर से गुजरते हैं और इस दौरान प्यार, रिश्तों तथा जीवन को लेकर उनकी सोच भी अलग-अलग दिखाई देती है।
समीर प्यार पर पूरा विश्वास करता है और एक के बाद एक रिश्तों में उलझता रहता है। दूसरी ओर आकाश प्रेम की अवधारणा को ही गंभीरता से नहीं लेता, लेकिन शालिनी से मुलाकात के बाद उसकी सोच बदलने लगती है। वहीं सिड की जिंदगी में तारा आती है, जो उम्र में उससे बड़ी है और दोनों के बीच एक अलग तरह का रिश्ता विकसित होता है।
‘दिल चाहता है’ की सबसे बड़ी खासियत तीन दोस्तों के रिश्ते और समय के साथ उसमें आने वाले बदलावों को दिखाना रही। गोवा की उनकी रोड ट्रिप, दोस्ती और प्यार को लेकर होने वाली बातचीत तथा बाद में रिश्तों में आई दूरियां फिल्म के सबसे यादगार दृश्यों में शामिल हो गईं।
समय बीतने के साथ फिल्म की लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई और इसे शुरुआती दौर की प्रतिक्रिया से कहीं अधिक पहचान मिली। बाद में यह फिल्म हिंदी सिनेमा की चर्चित कल्ट क्लासिक फिल्मों में शामिल हो गई।
यह फिल्म शहरी युवाओं की बदलती जीवनशैली को पर्दे पर पेश करने के लिए भी जानी जाती है। फैशन, संगीत और दोस्ती को जिस नए अंदाज में फिल्माया गया, उसने इसे अलग पहचान दिलाई। शंकर-एहसान-लॉय का संगीत और जावेद अख्तर के लिखे गीत आज भी फिल्म की सबसे बड़ी पहचान बने हुए हैं।















