भोपाल, 29 अगस्त।
मध्य प्रदेश के ट्रिपल आईटी सहित इंजीनियरिंग कॉलेजों में इस साल जो तस्वीर उभरी है, वह साफ बताती है कि छात्रों का रुझान तेजी से बदल चुका है। सत्र 2025-26 के एडमिशन आंकड़े और सत्र 2026-27 के शुरुआती रुझान बताते हैं कि कंप्यूटर साइंस से जुड़ी ब्रांचों में छात्रों की भीड़ बढ़ी है, जबकि सिविल और इलेक्ट्रिकल जैसी पारंपरिक ब्रांचों में एडमिशन कम हुए हैं। यह बदलाव केवल पसंद का नहीं, बल्कि भविष्य की सोच का नतीजा है।
डीटीई द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026-27 में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसई) में 15,180 सीटों पर एडमिशन का रुझान है, जबकि पिछले वर्ष 2025-26 में यह संख्या 16,435 थी। इसी तरह सीएसई एआई एंड मशीन लर्निंग में 5,660 के मुकाबले 6,862 और सिविल इंजीनियरिंग में 2,961 के मुकाबले 3,070 का आंकड़ा है। इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में 1,419 के मुकाबले 1,576 और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग में 1,055 के मुकाबले 1,141 का रुझान दिख रहा है। आंकड़े बताते हैं कि कोर ब्रांच की तुलना में कंप्यूटर से जुड़ी शाखाओं की मांग अधिक है।
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी) भोपाल में सत्र 2025-26 के एडमिशन के अनुसार 1,189 सीटों में से 1,068 सीटें भर गईं, जबकि 121 सीटें खाली हैं। कंप्यूटर साइंस कोर ब्रांच सबसे ज्यादा डिमांड में है। आंकड़ों के अनुसार एडमिशन का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा अकेले कंप्यूटर साइंस और एआई की ब्रांचों में गया है। कुल मिलाकर कंप्यूटर से जुड़ी ब्रांचों में छात्रों की होड़ है, जबकि सिविल और इलेक्ट्रिकल जैसी परंपरागत शाखाएं पिछड़ रही हैं।
एआई, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी में रोजगार के बेहतर अवसर और अच्छे पैकेज छात्रों को आकर्षित कर रहे हैं। जेईई में भी बच्चों का झुकाव एआई, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी की ओर है। नौकरी बाजार में सॉफ्टवेयर, एआई, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी की मांग बढ़ रही है। वहीं कोर ब्रांच में सरकारी नौकरियों के अलावा निजी क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम पैकेज मिलने से छात्र उधर नहीं जा रहे हैं।
लेकिन यदि सभी छात्र एक ही दिशा में जाएंगे तो कंप्यूटर क्षेत्र में भी भीड़ बढ़ेगी और प्रतिस्पर्धा कड़ी होगी। इसलिए छात्रों को केवल ट्रेंड के पीछे नहीं भागना चाहिए, बल्कि अपनी रुचि और क्षमता को भी देखना चाहिए। ट्रिपल आईटी सहित प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में यह बदलाव समय की मांग है, लेकिन संतुलन जरूरी है। देश को केवल कोडर ही नहीं, बल्कि अच्छे सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों की भी जरूरत है।














