नई दिल्ली, 29 अगस्त।
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान के बीच शनिवार को एक हाइड्रोपावर परियोजना से चार भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, बचाए गए सभी भारतीयों के जल्द काठमांडू पहुंचने की संभावना है। वहीं, लापता लोगों की पहचान और बचाव कार्य में सहयोग के लिए भारत ने फॉरेंसिक तथा सुरंग बचाव विशेषज्ञों की टीमें नेपाल भेजी हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि रसुवा स्थित हाइड्रोपावर परियोजना से रिपु कुमार, चंद्रशेखर नरजरी, कृपाशंकर और मोहम्मद मिन्हाजुद्दीन को सुरक्षित निकाला गया है। सभी को जल्द काठमांडू पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
मृतकों के अवशेषों की पहचान में नेपाली अधिकारियों की सहायता के लिए भारत से छह सदस्यीय फॉरेंसिक विशेषज्ञ दल भी नेपाल भेजा गया है। यह टीम डीएनए नमूनों की जांच के माध्यम से मृतकों की पहचान में सहयोग करेगी।
सुरंग में फंसे लोगों के बचाव के लिए विशेष तकनीकी दल पहले ही काठमांडू पहुंच चुका है। टीम ने गुरुवार को सुरंग बचाव अभियान का निरीक्षण किया था और शुक्रवार को प्रभावित इलाके की विस्तृत स्थिति का आकलन किया। विशेषज्ञों की सिफारिश के आधार पर विशेष सुरंग बचाव उपकरणों के साथ भारत से एक और दल के शनिवार को नेपाल पहुंचने की उम्मीद है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक शनिवार को चीन की दिशा से 120 भारतीय नागरिक नेपाल पहुंचे हैं। इससे पहले भी उस मार्ग से फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के प्रयास किए जाते रहे हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
अब तक नेपाल से कुल 88 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। मंत्रालय के अनुसार 287 भारतीय नागरिक अब भी लापता हैं, साथ ही भारतीय मूल के 128 अन्य लोगों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद व्यापक स्तर पर राहत कार्य चल रहा है। सड़क, पुल और संचार व्यवस्था को हुए भारी नुकसान के कारण बचाव दलों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। भारत नेपाल के साथ लगातार संपर्क में रहते हुए राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता और तकनीकी सहयोग उपलब्ध करा रहा है तथा पहले राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के दल और उपकरण भेजने की पेशकश भी कर चुका है।















