नई दिल्ली, 29 अगस्त।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने दिल्ली में हुए जेन जेड आंदोलन और उसके बाद सरकार की प्रतिक्रिया को भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार के रुख से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की भावनाओं को समझने और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की क्षमता मौजूद है।
जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस फैसले का समर्थन करते हुए थरूर ने कहा कि व्यवस्था ने जनता की आवाज के सामने झुकने का रास्ता चुना, लेकिन लोकतांत्रिक ढांचा कमजोर नहीं पड़ा।
दक्षिण एशिया के अन्य देशों की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए थरूर ने कहा कि बांग्लादेश और श्रीलंका में सरकारों ने जनता की आवाज को दबाने का प्रयास किया, जिसके बाद वहां की सरकारों को सत्ता छोड़नी पड़ी। नेपाल में सरकार बदली, लेकिन वहां का राजनीतिक ढांचा कायम रहा।
उन्होंने पाकिस्तान और म्यांमार का उदाहरण भी दिया। थरूर के अनुसार पाकिस्तान में सेना के प्रभाव वाली सरकार सत्ता में आई, वहीं म्यांमार में सेना ने पूरी तरह सत्ता पर कब्जा कर लिया। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों की तुलना में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था बेहतर साबित हुई, क्योंकि यहां युवाओं के आक्रोश को समझते हुए समय रहते कदम उठाए गए और स्थिति को संभाल लिया गया।
एक कार्यक्रम के दौरान धर्मेंद्र प्रधान का नाम लिए बिना थरूर ने कहा कि किसी ने इस्तीफा दिया है और यही लोकतंत्र की विशेषता है। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था को इतना सतर्क और लचीला होना चाहिए कि वह जनता की भावनाओं को पहचानकर आवश्यक निर्णय ले सके।
उन्होंने कहा कि यह भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण ताकत है। थरूर ने इस महीने की शुरुआत में सीजेपी के नेतृत्व वाले जेन जेड आंदोलन को लेकर यह भी कहा था कि आंदोलन में उठाए गए कई मुद्दे कांग्रेस के छात्र संपर्क अभियान ‘छात्रों की गूंज’ से जुड़े विषयों का हिस्सा रहे थे, हालांकि वह अभियान अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सका।
थरूर ने कहा था कि जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा उठाए गए मुद्दों को कांग्रेस पहले भी सामने ला चुकी थी। राहुल गांधी ने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए पेपर लीक के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को आत्ममंथन करने की जरूरत है कि आखिर उससे कहां चूक हुई। पार्टी को यह समझना होगा कि क्या वह युवाओं की बात ठीक ढंग से नहीं सुन सकी या फिर जेन जेड की सोच और उनकी नब्ज को समझने में पीछे रह गई।















