न्यूयॉर्क, 29 अगस्त।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क स्थित दुनिया के पहले इस्कॉन केंद्र का दौरा किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व अनेक प्रकार के संघर्षों और मतभेदों से गुजर रहा है। ऐसे माहौल में कृष्ण चेतना की भावना ही शांति और सद्भाव का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
उन्होंने कहा कि दुनिया में विविधताएं और विचारों में अंतर स्वाभाविक हैं तथा इनके कारण कई स्थानों पर संघर्ष की स्थिति भी बनती है। यदि लोगों में यह समझ विकसित हो जाए कि समस्त सृष्टि कृष्ण का ही अंश है, तो समाज और विश्व में अधिक सकारात्मक, शांतिपूर्ण तथा बेहतर वातावरण का निर्माण किया जा सकता है।
भागवत न्यूयॉर्क के 26 सेकंड एवेन्यू स्थित उस स्थान पर भी पहुंचे, जहां स्वामी प्रभुपाद ने जुलाई 1966 में इस्कॉन की स्थापना की थी। इस स्थान को मैचलैस गिफ्ट्स के नाम से भी जाना जाता है। इस्कॉन इस वर्ष अपनी स्थापना की 60वीं वर्षगांठ मना रहा है और वर्तमान में उसके 120 देशों में करीब 1,300 मंदिर संचालित हैं।
मोहन भागवत 25 अगस्त को न्यूयॉर्क पहुंचे थे। संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर वे अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान उनका भारतीय समुदाय और विभिन्न संगठनों के कार्यक्रमों में शामिल होने का कार्यक्रम है।
भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ में भाग लेंगे। यह आयोजन संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़े कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा है और इसका आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग फोरम कर रहा है। कार्यक्रम में भागवत के संबोधन का भी आयोजन किया गया है।
मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर विरोध भी सामने आया है। अमेरिका के कई हिंदू संगठनों सहित 61 इंटरफेथ और धर्मनिरपेक्ष संगठनों ने एक खुला पत्र जारी कर कार्यक्रम का विरोध किया और इसे रद्द करने की मांग की है।
हिंदूस फॉर ह्यूमन राइट्स, इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल और इंटरफेथ सेंटर ऑफ न्यूयॉर्क सहित कई संगठनों ने मंगलवार को न्यूयॉर्क सिटी हॉल के बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी मांग रखी थी।
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी भी इस कार्यक्रम को लेकर अपनी असहमति जता चुके हैं। उन्होंने संघ को लोगों को बांटने वाली सोच से जुड़ा बताया और कहा कि वह इस आयोजन का समर्थन नहीं करते। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि निजी तौर पर आयोजित कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार शहर प्रशासन के पास है या नहीं, इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।
इस बीच हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने कार्यक्रम से पहले सुरक्षा संबंधी सलाह जारी की है। संगठन ने कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों से सतर्क रहने, आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रहने की अपील की है।
फाउंडेशन ने कहा कि आयोजन को रोकने और रद्द कराने के प्रयास किए गए हैं। संगठन ने न्यूयॉर्क प्रशासन से कार्यक्रम में आने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके नागरिक अधिकारों की रक्षा करने की मांग की है।
भागवत के अमेरिका दौरे से पहले अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने संघ पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। आयोग ने 19 अगस्त को अमेरिकी सरकार से संघ के नेताओं को उच्चस्तरीय राजनयिक सुविधाएं नहीं देने और उनके साथ आधिकारिक बैठकें नहीं करने की अपील भी की थी।
भारत ने आयोग की टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 20 अगस्त को आयोग को पक्षपाती संस्था बताते हुए कहा था कि वह लंबे समय से भारत के संबंध में गलत और भड़काऊ टिप्पणियां करता रहा है, इसलिए उसके बयानों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है।
आयोग ने मार्च में जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर चिंता व्यक्त की थी। रिपोर्ट में संघ और रॉ सहित कुछ संगठनों तथा व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई और प्रतिबंध की सिफारिश की गई थी।
भारत सरकार ने उस रिपोर्ट को विकृत और चुनिंदा बताते हुए खारिज कर दिया था। सरकार का कहना था कि रिपोर्ट में ऐसे स्रोतों का सहारा लिया गया है जिनकी विश्वसनीयता संदिग्ध है और भारत की परिस्थितियों का एकतरफा चित्र प्रस्तुत किया गया है।
मोहन भागवत इससे पहले वर्ष 2018 में भी अमेरिका की यात्रा कर चुके हैं। उस समय उन्होंने शिकागो में 7 से 9 सितंबर तक आयोजित दूसरे विश्व हिंदू कांग्रेस में हिस्सा लिया था। इस कार्यक्रम में 60 देशों के लगभग 2,500 प्रतिनिधि शामिल हुए थे और भागवत ने उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया था।
वर्ष 2018 की यात्रा से जुड़ी उपलब्ध रिपोर्टों में भागवत की किसी अमेरिकी राजनयिक के साथ मुलाकात अथवा उन्हें औपचारिक राजनयिक सम्मान दिए जाने का उल्लेख नहीं मिलता। उनका वह दौरा मुख्य रूप से विश्व हिंदू कांग्रेस और उससे संबंधित आयोजनों तक केंद्रित रहा था।















