अलीपुरद्वार, 29 अगस्त।
वर्षाकाल के दौरान भूटान की पहाड़ियों से बहकर आने वाली उफनती जलधाराओं और अचानक आने वाले सैलाब ने एक बार फिर सीमावर्ती भारतीय क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। भूटान के फुंटशोलिंग और आसपास के पहाड़ी हिस्सों में मूसलाधार बारिश के बाद अब देश के जयगांव तथा हाशिमारा जैसे इलाकों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासनिक अनदेखी के चलते तोर्षा नदी और हाशिमारा झोरा के तटों पर धड़ल्ले से अवैध निर्माण किए जा रहे हैं, जिनमें बहुमंजिला इमारतें और आलीशान रिसॉर्ट शामिल हैं। गुआबाड़ी तलाबस्ती, न्यू सुभाषपल्ली और छोटा मेचियाबस्ती जैसे संवेदनशील इलाकों में प्राकृतिक बहाव क्षेत्र को पाटकर पक्के मकान खड़े कर दिए गए हैं।
नदी के किनारों से अवैध रूप से रेत, बजरी और बड़े बोल्डर निकालने के कारण तटबंध लगातार कमजोर होते जा रहे हैं, जिससे पिछले दिनों जलस्तर बढ़ने पर सड़कों में गहरी दरारें तक देखी गई थीं। स्थानीय लोगों ने अंदेशा जताया है कि यदि पहाड़ों की तरफ से भारी बाढ़ का पानी आया तो यहां किसी बड़ी तबाही को रोक पाना बेहद मुश्किल होगा।
बढ़ते मामलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कालचीनी के विधायक और मंत्री विशाल लामा ने इन तमाम कथित अवैध निर्माणों की उच्च स्तरीय जांच कराने का ऐलान किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्राकृतिक संतुलन से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और सिंचाई विभाग के साथ मिलकर सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।















