मॉस्को, 29 अगस्त।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इस सप्ताह मॉस्को में हुई उच्च स्तरीय कूटनीतिक बैठकों पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने वेटिकन के वरिष्ठ प्रतिनिधि आर्कबिशप पॉल रिचर्ड गैलाघर के साथ हुई व्यापक चर्चा का ब्योरा दिया, जिसमें मुख्य रूप से यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने और मानवीय मुद्दों पर विचार किया गया।
शुक्रवार को दिए गए एक इंटरव्यू में लावरोव ने बताया कि वेटिकन के साथ कैदियों और मृतकों के शवों की अदला-बदली जैसे विषयों पर बात हुई है। उन्होंने पुराने समझौतों का हवाला देते हुए कहा कि पश्चिमी देशों और यूक्रेन ने अतीत में हुए करारों का सम्मान नहीं किया, जिससे रूस का भरोसा डिगा है।
ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा प्रस्तावित 'स्टेबिलाइजेशन फोर्स' का कड़ा विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी सैन्य तैनाती से यूक्रेन की सत्ता को अनुचित समर्थन मिलेगा। उन्होंने साफ किया कि मौजूदा सीमा रेखा पर फौरी तौर पर युद्धविराम लागू करने से केवल कुछ समय के लिए संघर्ष थमेगा, लेकिन इससे कोई ठोस या स्थायी समाधान नहीं निकल पाएगा।
सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ के दौरे के संबंध में लावरोव ने चुप्पी साधते हुए कहा कि वे उस मुलाकात में शामिल नहीं थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खुफिया एजेंसियां अमूमन गोपनीय चैनलों के माध्यम से संवाद करती हैं और इस प्रकार की वार्ताओं को सार्वजनिक न करना एक आम प्रक्रिया है।
अतीत के अनुभवों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अब फरवरी 2022 से पहले जैसे रूस और पश्चिम के रिश्तों में सुधार की गुंजाइश लगभग खत्म हो चुकी है। अंत में उन्होंने कहा कि रूस अमेरिका की तरफ से आने वाले किसी भी नए प्रस्ताव को सुनने के लिए पूरी तरह तैयार है, मगर जमीन पर उसकी सैन्य गतिविधियां लगातार जारी रहेंगी।















