काठमांडू, 31 अगस्त।
नेपाल में पिछले पांच दिनों से जारी भीषण प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने बताया कि बाढ़ में अब तक 781 लोगों की मौत हो चुकी है और 9,435 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
प्रधानमंत्री ने राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि रसुवा की भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से हुए जन-धन और भौतिक नुकसान का पूरा आकलन करना अब भी चुनौती बना हुआ है। खराब मौसम, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लगातार खतरे के बावजूद सरकार युद्धस्तर पर बचाव कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि अब तक हवाई और सड़क मार्ग से 9,435 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। राहत अभियान के लिए कुल 394 उड़ानें संचालित की गई हैं, जिनमें रविवार को 72 उड़ानें शामिल रहीं। प्रभावित इलाकों में नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 20,618 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।
जलविद्युत परियोजना क्षेत्रों से नेपाली सेना के हेलीकाप्टरों के माध्यम से 279 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। भारतीय विशेषज्ञ दल की सहायता से रसुवा में अपर त्रिशूली-1 परियोजना के आसपास दो दिनों में 250 लोगों का बचाव किया गया।
भारतीय दल के अलावा चीनी और कोरियाई विशेषज्ञ भी नेपाली सेना के साथ बचाव अभियान में जुटे हैं। भारतीय टीम सुरंग के भीतर लगभग तीन किलोमीटर तक लोगों की तलाश कर रही है।
नुवाकोट स्थित अपर त्रिशूली-3 ‘ए’ परियोजना की सुरंग में भी राहत और बचाव कार्य जारी है। नेपाली सेना के इंजीनियर ब्लास्टिंग के जरिए रास्ता खोलने का प्रयास कर रहे हैं।
सेना, सशस्त्र पुलिस के प्रशिक्षित कुत्तों और नेपाल पुलिस के विशेषज्ञों सहित 90 सदस्यीय संयुक्त दल मौके पर काम कर रहा है। सुरंग में दो बाई तीन फीट का छेद बनाया गया था, लेकिन भीतर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
इसके बाद भारी उपकरणों की मदद से ब्लास्टिंग करने और सुरंग को चौड़ा करने का काम एक साथ चल रहा है। अपर त्रिशूली-3 ‘बी’, चिलिमे, लांगटांग खोला और मैलुंग खोला जलविद्युत परियोजनाओं में भी बचाव अभियान जारी है।
इन परियोजनाओं में भारतीय विशेषज्ञ नेपाली सेना के साथ समन्वय कर राहत कार्यों में सहयोग दे रहे हैं। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों से 267 घायलों को निकालकर स्थानीय और काठमांडू के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
इनमें से 156 लोगों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवा और मनोपरामर्श उपलब्ध कराने के लिए काठमांडू से डॉक्टरों की टीमें भेजी गई हैं।
प्रधानमंत्री शाह ने बताया कि आर्थिक सहायता जुटाने के लिए प्रधानमंत्री दैवी प्रकोप कोष और प्रधानमंत्री राहत कोष के माध्यम से राशि एकत्र की जा रही है। रविवार दोपहर तक नौ वाणिज्यिक बैंकों में 5 अरब 24 करोड़ 79 लाख 44 हजार 585 नेपाली रुपये जमा हो चुके थे।
इसके अतिरिक्त हिमालयन और लक्ष्मी बैंक में 21 लाख 232 अमेरिकी डॉलर भी जमा हुए हैं। रसुवा और नुवाकोट में 26 अस्थायी आश्रय और राहत वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
रविवार को इन केंद्रों के जरिए 3,454 लोगों को अस्थायी आश्रय और राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई। भारत और चीन समेत कई देशों से नेपाल के लिए राहत सामग्री भेजी जा रही है।
भारत से चार चरणों में अब तक 68.5 टन मानवीय सहायता और आवश्यक दवाएं पहुंच चुकी हैं। भारत ने 230 फीट लंबा एकल लेन मॉड्यूलर स्टील पुल भी भेजा है और सात अन्य बेली पुल उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई है।
नेपाल की ओर से 30 बेली पुलों की मांग की गई है। एशियाई विकास बैंक ने 50 लाख डॉलर के बजटीय अनुदान और 1.5 लाख डॉलर की तकनीकी सहायता देने का आश्वासन दिया है।
विश्व बैंक से 16.7 करोड़ डॉलर का रियायती ऋण मिलने की उम्मीद है। अमेरिका ने 5 लाख डॉलर और ऑस्ट्रेलिया ने 10 लाख डॉलर की सहायता देने का भरोसा दिया है।
स्विट्जरलैंड से संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से उपयोग के लिए 10 लाख स्विस फ्रैंक की सहायता भी मिली है। बाढ़ से नेपाल टेलिकॉम के 38 और एनसेल के 27 टावर प्रभावित हुए थे।
अब तक नेपाल टेलिकॉम के 106 और एनसेल के 75 टावर दोबारा चालू किए जा चुके हैं। प्रभावित क्षेत्रों में संचार व्यवस्था के लिए 20 सैटेलाइट फोन भी भेजे गए हैं।
प्रधानमंत्री के अनुसार, बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 781 शव बरामद किए गए हैं। नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल शवों के प्रबंधन का कार्य कर रहे हैं।
जिन शवों की पहचान हो चुकी है, उन्हें उनके परिजनों को सौंपा जा रहा है। अज्ञात शवों की पहचान के लिए डीएनए सहित अन्य आवश्यक साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि सरकार आपदा से प्रभावित प्रत्येक नागरिक के अभिभावक के रूप में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने विश्वास जताया कि एकजुटता और सामूहिक प्रयासों से नेपाल इस संकट से बाहर निकलेगा।
उन्होंने कहा कि राहत पहुंचाने के साथ पुनर्निर्माण और पुनर्वास का कार्य अंतिम परिणाम आने तक लगातार जारी रहेगा।















