उज्जैन, 31 अगस्त।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद माह की पहली और भगवान महाकाल की पांचवीं सवारी सोमवार शाम 4 बजे निकलेगी। सभामंडप में विधिवत पूजन-अर्चन के बाद बाबा महाकाल पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान करेंगे। इस दौरान श्रद्धालुओं को भगवान के पांच स्वरूपों के दर्शन होंगे।
सवारी को लेकर मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। पूजन के पश्चात बाबा महाकाल की पालकी मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचेगी, जहां सशस्त्र पुलिस बल के जवान भगवान को सलामी देंगे।
इसके बाद निर्धारित मार्ग पर सवारी आगे बढ़ेगी। इसमें घुड़सवार पुलिस दल, सशस्त्र पुलिस बल, होमगार्ड, भजन मंडली, झांझ मंडली और पुलिस बैंड शामिल रहेंगे।
रामघाट पर होगा मां क्षिप्रा के जल से अभिषेकमहाकाल की सवारी महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी से होते हुए रामघाट पहुंचेगी। यहां मां क्षिप्रा के पवित्र जल से भगवान महाकाल का अभिषेक और पूजन किया जाएगा।
पूजन के बाद सवारी मंदिर की ओर लौटेगी। वापसी में रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड और टंकी चौराहा शामिल रहेंगे।
इसके बाद सवारी छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी बाजार से गुजरते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचेगी।
फेसबुक और एलईडी पर होंगे सजीव दर्शनमहाकाल मंदिर प्रबंध समिति के फेसबुक पेज के माध्यम से सवारी का सजीव प्रसारण किया जाएगा। सवारी के अंतिम हिस्से में चलित रथ पर लगी एलईडी स्क्रीन से भी श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन कर सकेंगे।
इधर, सोमवार तड़के चार बजे मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही भस्म आरती शुरू हुई। पुजारी और पुरोहितों ने गर्भगृह में भगवान महाकाल सहित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया।
इसके बाद जलाभिषेक कर भगवान का दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया। भस्म आरती की परंपरा के तहत प्रथम घंटाल के बाद भगवान को हरिओम का जल अर्पित किया गया।
मंत्रोच्चार और ध्यान के बाद कपूर आरती हुई। इसके पश्चात ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म चढ़ाने की परंपरा भी पूरी की गई।
भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। भगवान को भांग, चंदन और त्रिपुंड से सजाया गया तथा शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला धारण कराई गई।
मोगरे और गुलाब के पुष्प भी अर्पित किए गए। इसके बाद फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।
भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों ने बाबा महाकाल और नंदी महाराज के दर्शन किए तथा नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कहीं।
मंदिर परिसर पूरे समय बाबा महाकाल के जयकारों से गूंजता रहा। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी परंपरा के चलते महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बनी हुई है।















