जयपुर, 31 अगस्त।
राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ सोमवार को वकीलों के एक समूह ने विरोध प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने उनके कोर्ट रूम के बाहर नारेबाजी की और अदालत की कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शन के कारण बड़ी संख्या में वकील कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अदालत में मामलों की सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए। बाद में प्रदर्शनकारी अधिवक्ता हाई कोर्ट परिसर में एकत्र हुए और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की कार्यशैली को लेकर नाराजगी जताई। दिनभर न्यायालय परिसर में इस मुद्दे को लेकर माहौल गरम रहा।
हालांकि, राजस्थान हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने इस प्रदर्शन को आधिकारिक समर्थन नहीं दिया है। सोमवार को हुआ विरोध वकीलों के एक समूह की पहल के रूप में सामने आया है, लेकिन कोर्ट रूम के बाहर नारेबाजी और सुनवाई के बहिष्कार से मामला चर्चा में आ गया।
यह विरोध सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता की ओर से भारत के मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए पत्रों के सामने आने के बाद तेज हुआ है। पत्रों में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए गए थे और कथित तौर पर उन्हें राजस्थान से हटाने की मांग भी की गई थी।
पत्र सार्वजनिक होने के बाद राजस्थान हाई कोर्ट के न्यायिक और अधिवक्ता वर्ग में इस विषय पर चर्चा बढ़ गई। इसी क्रम में वकीलों के एक समूह ने सोमवार को खुलकर विरोध प्रदर्शन करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अदालत के बाहर नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान अदालत की सुनवाई भी प्रभावित हुई और बड़ी संख्या में अधिवक्ता वहां पेश नहीं हो सके। हालांकि बार एसोसिएशन की ओर से किसी आधिकारिक बहिष्कार की घोषणा नहीं की गई थी और न ही संगठन ने प्रदर्शन का समर्थन किया।
इस विवाद को लेकर जोधपुर और जयपुर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के बीच पिछले कुछ दिनों से बातचीत चल रही है। दोनों संगठनों के प्रतिनिधि आगे की रणनीति को लेकर विचार कर रहे हैं और सोमवार को प्रस्तावित संयुक्त बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
बैठक में वकीलों के प्रदर्शन, अदालत के बहिष्कार और जस्टिस संदीप मेहता के पत्रों से जुड़े घटनाक्रम पर चर्चा होने की संभावना है। इसके बाद ही दोनों बार एसोसिएशन का आधिकारिक रुख और आगे की रणनीति स्पष्ट हो सकेगी।















