जगदलपुर, 31 अगस्त।
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नरसंहार मामले में 31 अगस्त को आने वाला फैसला टल गया है। जगदलपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत अब इस मामले में 5 सितंबर को अपना निर्णय सुनाएगी। करीब 13 वर्षों से चल रहे इस मामले में अदालत ने पहले फैसला सुनाने के लिए 31 अगस्त की तारीख निर्धारित की थी।
घटना के दो दिन बाद मामले की जांच एनआईए ने अपने हाथ में ले ली थी। जांच एजेंसी ने सितंबर 2014 में आरोप पत्र दाखिल किया और सितंबर 2015 में पूरक आरोप पत्र प्रस्तुत किया था। शुरुआत में मामले में 11 लोगों को आरोपित बनाया गया था, लेकिन सुनवाई के दौरान एक आरोपित की मृत्यु हो गई। अब अदालत शेष 10 आरोपितों के संबंध में फैसला सुनाएगी। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान 294 सुनवाइयां हुईं और अभियोजन पक्ष ने आरोप साबित करने के लिए 101 गवाहों के बयान तथा महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य अदालत में रखे।
अगस्त 2026 में अभियोजन और बचाव पक्ष की अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखते हुए 31 अगस्त की तारीख तय की थी। अब निर्णय टलने के बाद पीड़ित परिवारों, राजनीतिक दलों और बस्तर के लोगों की निगाहें 5 सितंबर पर लगी हैं। जिन 10 आरोपितों के खिलाफ सुनवाई हुई है, वे वर्तमान में जगदलपुर केंद्रीय जेल में बंद बताए जा रहे हैं। अदालत अब प्रस्तुत गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर तय करेगी कि आरोप सिद्ध होते हैं या नहीं।
झीरम कांड को लेकर लंबे समय से यह सवाल भी उठता रहा है कि हमला केवल माओवादियों की कार्रवाई था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश थी। इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी होते रहे हैं। अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और विचाराधीन आरोपों के आधार पर ही आरोपितों की दोषी या निर्दोष होने की स्थिति तय की जाएगी।
झीरम हमले के बाद नक्सल हिंसा और राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा को लेकर देशभर में गंभीर सवाल खड़े हुए थे। 31 अगस्त को फैसला नहीं आने के बाद इस मामले का न्यायिक निर्णय अब 5 सितंबर को आने की उम्मीद है। 13 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे मृतकों के परिजनों के लिए यह तारीख बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। 25 मई 2013 का वह दिन आज भी बस्तर की स्मृतियों में दर्ज है और अब सबकी नजर अदालत के आगामी फैसले पर है।
उल्लेखनीय है कि झीरम घाटी कांड ने 25 मई 2013 को पूरे देश को झकझोर दिया था। उस दिन कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा से जगदलपुर लौट रही थी। दरभा क्षेत्र की पहाड़ियों के बीच स्थित झीरम घाटी में पहले से घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने यात्रा के काफिले पर हमला कर दिया था।
एनआईए के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार हमला शाम करीब 4:15 बजे हुआ था। जांच एजेंसी और अदालत के दस्तावेजों के अंतिम संकलन तथा बाद में दम तोड़ने वाले घायलों को मिलाकर इस भीषण नक्सली हमले में कुल 32 लोगों की मौत हुई। एनआईए की वेबसाइट पर यह मामला आरसी-06/2013/एनआईए/डीएलआई–डरभा झीरम घाटी हमला मामले के रूप में दर्ज है। जांच एजेंसी के अनुसार हत्या, आपराधिक षड्यंत्र, डकैती, हथियार कानून और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था।
झीरम घाटी नरसंहार में तत्कालीन छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश पटेल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, उदय मुदलियार और योगेंद्र शर्मा समेत कई कांग्रेस नेता तथा सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। महेंद्र कर्मा नक्सल हिंसा के खिलाफ लंबे समय से मुखर रहे थे और नक्सलियों के प्रमुख विरोधियों में माने जाते थे। हमलावरों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले को चारों ओर से घेरकर गोलीबारी की थी। एनआईए के रिकॉर्ड में हमले के बाद घटनास्थल से हथियार और संचार उपकरण लूटे जाने का भी उल्लेख है।















