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मध्य प्रदेश
31 Aug, 2026

रोगमुक्त पशुधन से दुग्ध उत्पादन में नंबर वन बनने की राह पर मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में खुरपका-मुंहपका और ब्रूसेलोसिस नियंत्रण के लिए व्यापक टीकाकरण, डिजिटल पहचान और पशु चिकित्सा सेवाओं से रोगमुक्त पशुधन का मजबूत आधार तैयार किया जा रहा है।

भोपाल, 31 अगस्त।

मध्य प्रदेश को देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य बनाने का लक्ष्य केवल घोषणा तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की राष्ट्रीय दुग्ध उत्पादन में हिस्सेदारी 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है और राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम इसके लिए मजबूत आधार तैयार कर रहा है।

प्रदेश में पशुधन को गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चल रहा है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुपालकों की आय और डेयरी उद्योग के भविष्य से सीधे जुड़ी है। राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत खुरपका-मुंहपका और ब्रूसेलोसिस जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

प्रदेश के सभी 55 जिलों में खुरपका-मुंहपका रोग के खिलाफ टीकाकरण किया जा रहा है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश केंद्र सरकार के टीकाकरण कार्यक्रम में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है और पिछले चरण में भी निर्धारित लक्ष्य हासिल किया गया था।

वर्तमान में खुरपका-मुंहपका टीकाकरण का आठवां चरण जारी है। पशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए यह टीकाकरण प्रत्येक छह माह में कराया जाता है।

गाय, बैल और भैंस के साथ भेड़, बकरी तथा सूअरों को भी तय व्यवस्था के तहत निशुल्क टीके लगाए जा रहे हैं। खुरपका-मुंहपका अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जिसका असर पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादकता के साथ पशुपालकों की आय पर भी पड़ता है।

बीमारी की स्थिति में पशुओं को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के लिए मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 1962 टोल-फ्री नंबर के माध्यम से पशुपालकों को घर और फार्म तक पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

पशुपालन एवं डेयरी विभाग का मानना है कि खुरपका-मुंहपका मुक्त क्षेत्र बनने के बाद प्रदेश के डेयरी उद्योग में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। बीमारियों का प्रभाव घटने से पशुओं की उत्पादकता बनाए रखने, दूध उत्पादन को स्थिर रखने और पशुपालकों के आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।

मध्य प्रदेश में पशुपालन केवल कृषि का सहायक क्षेत्र नहीं है, बल्कि लाखों ग्रामीण परिवारों की आय और आजीविका का प्रमुख आधार है। हर छह माह में होने वाला टीकाकरण, ब्रूसेलोसिस नियंत्रण और अन्य व्यवस्थाएं पशुधन स्वास्थ्य को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।

डिजिटल पहचान भी इस अभियान का अहम हिस्सा है। लक्षित पशुओं के कानों में 12 अंकों वाला विशिष्ट ईयर-टैग लगाया जा रहा है और उनकी जानकारी भारत पशुधन पोर्टल पर दर्ज की जा रही है।

इस डिजिटल व्यवस्था से पशुओं की पहचान के साथ टीकाकरण और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पर नजर रखना आसान हो रहा है। डिजिटल निगरानी पशुधन स्वास्थ्य प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाने में भी सहायक बन रही है।

पहले प्रदेश के दुधारू पशुओं को खुरपका-मुंहपका और ब्रूसेलोसिस जैसी गंभीर बीमारियों के कारण हर वर्ष करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता था। खुरपका-मुंहपका के चलते दूध उत्पादन में अचानक 80 प्रतिशत तक गिरावट आ जाती थी, जिससे डेयरी व्यवसाय प्रभावित होता था।

ब्रूसेलोसिस के कारण मादा पशुओं में पहली गर्भावस्था के दौरान गर्भपात की समस्या सामने आती थी। यह स्थिति पशुपालकों के लिए बड़ा आर्थिक नुकसान साबित होती थी।

इन बीमारियों और आर्थिक नुकसान के चक्र को तोड़ने के लिए पशुपालन विभाग ने त्रि-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैयार की है। इसके परिणामस्वरूप राज्य में पशु मृत्यु दर और बीमारियों की दर में अच्छी गिरावट दर्ज की गई है।

स्वस्थ पशुधन तैयार करने की दिशा में चल रहा यह प्रयास प्रदेश की डेयरी अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने का आधार बन सकता है। यदि टीकाकरण और रोग निगरानी की यही रफ्तार बनी रही तो मध्य प्रदेश राष्ट्रीय खुरपका-मुंहपका उन्मूलन लक्ष्य में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

क्रियान्वयन की वर्तमान गति जारी रहने पर मध्य प्रदेश वर्ष 2030 तक खुरपका-मुंहपका और ब्रूसेलोसिस के पूर्ण उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को समय से पहले हासिल कर सकता है। इसके साथ ही प्रदेश डेयरी और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का एक प्रभावी मॉडल प्रस्तुत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

देश के हृदय स्थल के रूप में पहचाना जाने वाला मध्य प्रदेश इस सोच को जमीन पर उतारने में अग्रणी राज्यों में उभरा है। पशुधन स्वास्थ्य के जरिए विशाल ग्रामीण आबादी के आर्थिक सशक्तिकरण की एक नई राह तैयार हो रही है।

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