कोलकाता, 31 अगस्त।
भारत और रूस के दशकों पुराने भरोसे और रणनीतिक सहयोग को नई तकनीक, नवाचार, व्यापार, विनिर्माण, ऊर्जा, शिक्षा और जनसंपर्क के नए क्षेत्रों से जोड़कर आगे बढ़ाने की जरूरत है। केंद्रीय शिक्षा एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कोलकाता में आयोजित भारत-रूस द्विपक्षीय सम्मेलन ‘संपर्क’ को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मजूमदार ने भारत-रूस संबंधों को समय की कसौटी पर खरा उतरी साझेदारी बताया। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिवेश के साथ दोनों देशों के संबंधों को भी नए स्वरूप में विकसित करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि दशकों से बना आपसी विश्वास इस साझेदारी की सबसे बड़ी शक्ति है। अब इस मजबूत आधार को 21वीं सदी की चुनौतियों और संभावनाओं के अनुरूप नए क्षेत्रों तक विस्तार देने की आवश्यकता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत के औद्योगीकरण के शुरुआती दौर से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र तक रूस तथा तत्कालीन सोवियत संघ महत्वपूर्ण सहयोगी रहे हैं। यह ऐतिहासिक संबंध भविष्य की साझेदारी को अधिक व्यापक और महत्वाकांक्षी बनाने का अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने विनिर्माण, रेलवे, विमानन, खनन, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार को भारत-रूस सहयोग के प्रमुख क्षेत्र बताया। उनके अनुसार रणनीतिक साझेदारी के साथ दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को भी नई मजबूती देनी होगी।
उन्होंने कहा कि इस दिशा में उद्योग और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा। दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग के नए अवसरों को भी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की जरूरत है।
ऊर्जा क्षेत्र को सहयोग का एक महत्वपूर्ण आधार बताते हुए मजूमदार ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी का उल्लेख किया। उन्होंने मौजूदा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ नई संभावनाओं पर काम करने की आवश्यकता जताई।
उन्होंने उन्नत परमाणु तकनीक और छोटे मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया।
केंद्रीय मंत्री ने विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और युवा नवोन्मेषकों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारत-रूस संबंध केवल सरकारों के स्तर तक सीमित नहीं रहने चाहिए।
विश्वविद्यालयों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों और युवाओं को भी इस साझेदारी में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। इससे दोनों देशों के बीच सहयोग को व्यापक आधार मिल सकता है।
मजूमदार ने कोलकाता की ऐतिहासिक बौद्धिक और सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शहर भारत और रूस के बीच नए संवाद और सहयोग का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक अध्ययन के क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ने से दोनों देशों की नई पीढ़ी के बीच संबंध और अधिक मजबूत होंगे।















