हल्द्वानी, 31 अगस्त।
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी में एससी-एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने यह कार्रवाई हल्द्वानी निवासी अमित कुमार पुत्र त्रिलोक सिंह की शिकायत के आधार पर की है।
पुलिस अभिलेखों के मुताबिक एफआईआर संख्या 297/2026 में भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 और 299 के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(q) लगाई गई है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि 11 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए सफाई एवं धार्मिक अनुष्ठान को राहुल गांधी ने 29 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान छुआछूत से जोड़कर टिप्पणी की थी। शिकायत के अनुसार, उन्होंने कार्यक्रम में शामिल लोगों के खिलाफ एससी-एसटी अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग भी की थी।
अमित कुमार का कहना है कि वह अनुसूचित जाति के वाल्मीकि समुदाय से हैं और 11 अगस्त को रामलीला मैदान में आयोजित सफाई एवं धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हुए थे। शिकायत में बताया गया कि आयोजन का उद्देश्य मैदान की सफाई और धार्मिक-सांस्कृतिक मर्यादा को बहाल करना था तथा इसका किसी व्यक्ति की जाति से संबंध नहीं था।
शिकायतकर्ता के अनुसार, राहुल गांधी के कथित बयान के बाद उन्हें और समिति से जुड़े लोगों को सार्वजनिक रूप से जातिवादी तथा दलित विरोधी के रूप में पेश किया गया। इससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित होने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में कथित तौर पर धमकी और अपमानजनक संदेश मिलने की बात भी कही गई है।
शिकायत में राहुल गांधी के खिलाफ एससी-एसटी अधिनियम की धारा 3(1)(q), 3(1)(r) और 3(1)(u) के साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 197 और 353 के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विवेचना के दौरान 29 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस के वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जाएगी।
इसके साथ ही रामलीला मैदान में आठ अगस्त को हुए राजनीतिक कार्यक्रम और 11 अगस्त के सफाई एवं धार्मिक अनुष्ठान से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
यह मामला शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर दर्ज किया गया है। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।















