उज्जैन, 31 अगस्त।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आगामी सिंहस्थ 2028 को भव्य और दिव्य स्वरूप देने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने उज्जैन में चल रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकों ने स्वेच्छा से अपने मकान हटाकर विकास कार्यों में जो सहयोग दिया है, वह केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण है। लोगों ने विकास की राह में मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे तक स्वेच्छा से हटाए हैं।
मुख्यमंत्री सोमवार शाम भगवान महाकालेश्वर की पंचम सवारी के महाकालेश्वर मंदिर से रामघाट पहुंचने के बाद प्रसारण कक्ष से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उज्जैन में विकास और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को लगातार गति दी जा रही है तथा सम्राट विक्रमादित्य की नगरी एक बार फिर उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ रही है।
डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन देश के पवित्र नगरों में विशेष स्थान रखती है। युगों से इसकी कीर्ति, आभा और पहचान बनी हुई है तथा महाकाल की विशेष कृपा से गौरव की यह नगरी अपने पुराने वैभव को फिर प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर की सावन-भादौ मास की सवारियों के क्रम में सोमवार को पंचम सवारी श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। अवंतिकानाथ नगर भ्रमण पर निकले और पांच स्वरूपों में श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। इस बार सवारी में पहली बार शामिल किया गया रोबोट विशेष आकर्षण बना, जिसने रामघाट पर भजन की धुन पर नृत्य किया। पहली बार प्रस्तुत की गई 84 महादेव की धार्मिक झांकी ने भी श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा। सवारी में करीब 1100 बटुक शामिल हुए।
आदिवासी दल के कलाकारों ने नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। शहर के विकास को दर्शाने वाली झांकियां भी निकाली गईं। घुड़सवार पुलिस दल, सशस्त्र पुलिस बल, होमगार्ड, भजन मंडली, झांझ मंडली और पुलिस बैंड सवारी का हिस्सा बने।
सवारी से पहले महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने भगवान महाकाल का विधिवत पूजन किया। इसके बाद बाबा महाकाल को चांदी की पालकी में विराजित किया गया और जयकारों के बीच नगर भ्रमण के लिए सवारी रवाना हुई। मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचते ही सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने पालकी में विराजमान भगवान महाकाल को सलामी दी।
भगवान महाकाल ने पांच स्वरूपों में नगर भ्रमण किया। चांदी की पालकी में श्री चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरुड़ रथ पर श्री शिव तांडव, नंदी रथ पर श्री उमा-महेश और डोल रथ पर होल्कर स्टेट के पारंपरिक मुखौटा स्वरूप ने श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। सवारी महाकाल घाटी, गुदरी, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी से होती हुई रामघाट पहुंची, जहां शिप्रा के पवित्र जल से भगवान का अभिषेक किया गया।
रामघाट पहुंचने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पालकी में विराजित भगवान चंद्रमौलेश्वर की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। पुजारी पं. आशीष शर्मा ने मां शिप्रा के जल से चंद्रमौलेश्वर का जलाभिषेक कराया। सवारी के रामघाट पहुंचने पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा भी की गई।
मुख्यमंत्री दत्त अखाड़ा की ओर से नाव में सवार होकर रामघाट पहुंचे। इस अवसर पर मंत्री गौतम टेटवाल, राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा और जितेंद्र उदय सिंह पंड्या, उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष रवि सोलंकी, संजय अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
बाबा महाकाल की पंचम सवारी का सजीव प्रसारण भी किया गया, जिससे करोड़ों श्रद्धालु जुड़े। अनेक देशों के श्रद्धालुओं ने भी इस विशेष प्रसारण व्यवस्था के माध्यम से सवारी के दर्शन किए। उज्जैन सहित प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों में श्रद्धा और उत्साह का विशेष वातावरण दिखाई दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और विश्व स्तर पर भारत का सम्मान लगातार बढ़ रहा है। विदेशों में रहने वाले भारतीय भी अपनी पहचान पर गर्व महसूस करते हैं और सनातन संस्कृति के वेद वाक्य दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार जनकल्याण के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ा रही है और भारत की कीर्ति विश्वभर में फैल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया गया है और बाबा महाकाल की कृपा से यह उनका 36वां अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है।
डॉ. यादव ने कहा कि महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन से सनातन संस्कृति और धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिली है। अब सरकार केवल उज्जैन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मध्य प्रदेश की प्राकृतिक, नैसर्गिक, वन्य संपदा और पुरातात्विक विरासत से जुड़े स्थलों को भी दुनिया के सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा महाकाल उत्तर और दक्षिण भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को जोड़ने वाले प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि दो सोमवार तक बाबा महाकाल नगर में दर्शन देने के लिए निकलेंगे और उनके आशीर्वाद से श्रद्धालु कृतार्थ होंगे। भक्ति की इस अनवरत धारा में सभी श्रद्धालु श्रद्धा के साथ सहभागी बन रहे हैं।















