अगत्ती, 31 अगस्त।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने लक्षद्वीप को देश की अमूल्य समुद्री संपदा बताते हुए इसके विशाल मत्स्य संसाधनों और समुद्री अर्थव्यवस्था की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 4,200 वर्ग किलोमीटर के लैगून क्षेत्र और लगभग चार लाख वर्ग किलोमीटर के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र के कारण लक्षद्वीप मत्स्य क्षेत्र में विशेष क्षमता रखता है।
अगत्ती में आयोजित मत्स्य पालन जनसंपर्क कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने सजावटी मत्स्य विकास के लिए ‘मिशन रंगीन मछली 2031’ रणनीतिक कार्ययोजना का विमोचन किया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार टुना, समुद्री शैवाल और सजावटी मछली जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के सतत उपयोग के साथ मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों और मत्स्य सहकारी समितियों को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केंद्र सरकार, लक्षद्वीप प्रशासन, वैज्ञानिक संस्थानों और मछुआरा समुदायों की उस साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके माध्यम से समुद्री अर्थव्यवस्था को सतत विकास और समृद्धि से जोड़ा जा रहा है। मत्स्य पालन और जलीय कृषि को अर्थव्यवस्था का तेजी से उभरता क्षेत्र बताते हुए उन्होंने लक्षद्वीप में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत 62 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी मिलने की सराहना की।
उपराष्ट्रपति ने विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और खुले समुद्र में उपलब्ध मत्स्य संसाधनों के जिम्मेदार एवं सतत उपयोग के लिए तैयार सरकारी व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इससे मछुआरों को गहरे समुद्र के संसाधनों तक पहुंचने और नए अवसरों का लाभ लेने में सहायता मिलेगी। लक्षद्वीप में एक लाख टन से अधिक मत्स्य उत्पादन क्षमता है, जिसमें करीब 94 हजार टन टुना और उससे संबंधित प्रजातियों की क्षमता शामिल है।
उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य दोहन, डिजिटल अनुमति प्रणाली, पोत निगरानी, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन और टिकाऊ मत्स्य पालन पद्धतियों को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार इन प्रयासों से मछुआरों की आय बढ़ाने के साथ वैश्विक समुद्री खाद्य बाजार में भारत की स्थिति को और मजबूत किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत लाभार्थियों को सहायता वितरित की। लाभ पाने वालों में हलीमा के चेरियादम, मल्स्याम फिशरमेन कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के अध्यक्ष, एंड्रोथ द्वीप के प्रतिनिधि, निजी उद्यमी अल्थाफ मुनाव्वर तनवीर, नूर मोहम्मद, अमीन बिन मोहम्मद सीएन, सादिक एस, नौशाद खान नशीदा महल, आशिक, किदावे कुन्हीकडियापाड़ा तथा मछुआरे अबू बकर उरियोदा और सबीह मुबारक शामिल रहे।
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि यह कार्यक्रम लक्षद्वीप के मछुआरा समुदाय की जरूरतों को समझने और उनकी आय बढ़ाने के लिए सरकार की व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे के विस्तार, समुद्री सुरक्षा, मूल्यवर्धन और बाजार तक पहुंच बढ़ाने के लिए सरकार एक समग्र कार्ययोजना पर काम कर रही है।
उन्होंने समुद्री क्रांति, मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे मत्स्य क्षेत्र को नई गति मिली है। भारत का मछली उत्पादन वर्ष 2013-14 के 95.7 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 197.75 लाख टन तक पहुंच गया है। व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद समुद्री खाद्य निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई और वर्ष 2025-26 में यह रिकॉर्ड 73,890 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
मत्स्य पालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन तथा पंचायती राज राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था में लक्षद्वीप की रणनीतिक भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। क्षेत्रफल में छोटा होने के बावजूद ये द्वीप देश के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और मछुआरों की आय में वृद्धि के लिए अंतरराष्ट्रीय सतत विकास प्रमाणन हासिल करने तथा वैश्विक स्तर पर ‘लक्षद्वीप सतत टुना’ ब्रांड विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि लक्षद्वीप को समुद्री शैवाल समूह के रूप में अधिसूचित किया गया है और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान के सहयोग से समुद्री शैवाल बैंक को मंजूरी दी गई है। लगभग दो करोड़ रुपये के निवेश से 575 समुद्री शैवाल संवर्धन इकाइयों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे महिलाओं, युवाओं और स्वयं सहायता समूहों के लिए आजीविका के नए अवसर तैयार होंगे।
उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने और द्वीपवासियों के लिए अतिरिक्त आय के साधन विकसित करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 19 मनोरंजक मत्स्य पालन इकाइयों को मंजूरी दी गई है।
मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि भारत के मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में लक्षद्वीप का रणनीतिक स्थान है। लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह मिलकर देश के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। सरकार मछली पालक उत्पादक संगठनों और मत्स्य सहकारी समितियों को वित्तीय, तकनीकी और क्षमता निर्माण संबंधी सहायता देकर लगातार सशक्त बना रही है।















