नई दिल्ली, 31 अगस्त।
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच हुए दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौते को भाजपा ने देश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। भाजपा सांसद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि यह समझौता केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान हुआ यह समझौता देश की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने में अहम भूमिका निभाएगा। इसके माध्यम से भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए निरंतर ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
सुधांशु त्रिवेदी ने ताशकंद के ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि देश इस स्थान को वर्ष 1966 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के रहस्यमय परिस्थितियों में निधन के कारण भी याद करता है। उन्होंने कहा कि उस दौर में भारत की परमाणु आत्मनिर्भरता को लेकर कई तरह की आशंकाएं व्यक्त की जाती थीं।
भाजपा सांसद के अनुसार, करीब 60 वर्ष बाद उसी ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान के साथ दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया।
त्रिवेदी ने कहा कि यह समझौता दर्शाता है कि भारत आज वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास के साथ अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ा रहा है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने दुनिया के विभिन्न देशों के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि यूरेनियम आपूर्ति समझौता केवल मौजूदा ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों में देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करने वाला कदम भी है।
भाजपा सांसद ने प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा को व्यापारिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस दौरे के दौरान भारत के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में भी अहम निर्णय लिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि भारत के पुरातत्व सर्वेक्षण ने उज्बेकिस्तान के तेरमेज क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन बौद्ध मठ के संरक्षण की जिम्मेदारी संभाली है। साथ ही भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद ने ताशकंद विश्वविद्यालय में संस्कृत पीठ की स्थापना की है।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि इंडोनेशिया के योग्याकार्ता प्रांत स्थित प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण से लेकर तेरमेज के बौद्ध मठ तक, भारत साझा सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने के साथ विभिन्न देशों से अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूत कर रहा है।















