हरिद्वार, 31 अगस्त।
भारत और मिस्र की प्राचीन ज्ञान एवं सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक शिक्षा तथा युवा विकास से जोड़ने की दिशा में देव संस्कृति विश्वविद्यालय और काहिरा स्थित ब्रिटिश यूनिवर्सिटी इन इजिप्ट के बीच महत्वपूर्ण शैक्षणिक समझौता हुआ।
मिस्र यात्रा पर पहुंचे देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या का ब्रिटिश यूनिवर्सिटी इन इजिप्ट में विशेष स्वागत किया गया। इस दौरान दोनों विश्वविद्यालयों ने अकादमिक सहयोग को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए।
डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भारत और मिस्र विश्व की दो महत्वपूर्ण प्राचीन ज्ञान एवं सांस्कृतिक परंपराओं के प्रतिनिधि देश हैं। दोनों सभ्यताओं ने मानवता को ज्ञान, जीवन-मूल्यों और संस्कृति की समृद्ध धरोहर प्रदान की है।
उन्होंने कहा कि अब इस विरासत को आधुनिक शिक्षा, अनुसंधान और युवा शक्ति के साथ जोड़कर भविष्य के लिए नई दिशा तय करने की आवश्यकता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि समाज और विश्व के प्रति जिम्मेदारी समझने वाले व्यक्तित्व तैयार करना भी है।
उन्होंने कहा कि भारत और मिस्र के विश्वविद्यालयों के बीच बढ़ता संवाद विद्यार्थियों और युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति, विचारों और ज्ञान परंपराओं को समझने का अवसर प्रदान करेगा। इससे वैश्विक स्तर पर संवेदनशील, जिम्मेदार और रचनात्मक युवा पीढ़ी के निर्माण में मदद मिलेगी।
डॉ. पण्ड्या ने कहा कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय ज्ञान के साथ संस्कृति, चरित्र निर्माण और सेवा को शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार मानता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता अकादमिक सहयोग के साथ अनुसंधान, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और युवाओं के लिए नए अवसरों का मार्ग खोलेगा।
समझौते के माध्यम से दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक एवं अकादमिक सहयोग बढ़ाने, ज्ञान के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए सार्थक अवसर विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
इस अवसर पर डॉ. चिन्मय पण्ड्या को सम्मान और मैत्री के प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित ‘काहिरा शील्ड’ भेंट की गई। ब्रिटिश यूनिवर्सिटी इन इजिप्ट ने उनकी यात्रा के लिए आभार जताते हुए दोनों संस्थानों के बीच मजबूत और दीर्घकालिक साझेदारी की उम्मीद व्यक्त की।















