नई दिल्ली, 31 अगस्त।
राष्ट्र निर्माण में अगली पीढ़ी की क्षमताओं के प्रभावी उपयोग और सशस्त्र बलों की भूमिका पर मंगलवार को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में महत्वपूर्ण विमर्श होगा। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र की दूसरी वार्षिक ‘ट्राइडेंट व्याख्यानमाला’ का उद्घाटन करेंगे और ‘राष्ट्र निर्माण के लिए अगली पीढ़ी की क्षमता के लाभ उठाने’ विषय पर अपने विचार रखेंगे।
संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र की वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस व्याख्यानमाला का मुख्य विषय ‘रक्षा बलों के परिप्रेक्ष्य से राष्ट्रीय पुनरुत्थान’ रखा गया है। इसमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और रक्षा विशेषज्ञ राष्ट्रीय विकास तथा सुरक्षा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे।
कार्यक्रम में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, संसाधनों के समन्वित उपयोग, बहु-क्षेत्रीय अभियानों और राष्ट्र निर्माण में सशस्त्र बलों की भागीदारी जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। बदलती सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप सैन्य क्षमताओं के बेहतर उपयोग पर भी विशेषज्ञ अपनी राय रखेंगे।
चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष और संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष, एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ‘आपसी तालमेल और एकीकरण के उभरते आयाम’ विषय पर मुख्य व्याख्यान देंगे। लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला (सेवानिवृत्त) ‘नागरिक-सैन्य संलयन : राष्ट्रीय विकास का मार्ग’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।
उप सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ‘स्मार्ट युद्ध प्रणाली : बहु-क्षेत्रीय अभियान और सैन्य तालमेल की अवधारणा’ विषय पर संबोधित करेंगे। व्याख्यानमाला में रक्षा क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलाव, संयुक्त सैन्य अभियानों और तीनों सेनाओं के बीच मजबूत समन्वय के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा होगी।
सैन्य संसाधनों के एकीकृत उपयोग के साथ नागरिक और सैन्य क्षेत्रों के बीच सहयोग को मजबूत बनाने के उपायों पर भी विचार किया जाएगा। वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व और विशेषज्ञ राष्ट्रीय सुरक्षा तथा विकास की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप सशस्त्र बलों की क्षमताओं के प्रभावी इस्तेमाल की संभावनाओं पर मंथन करेंगे।
संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र की स्थापना वर्ष 2007 में एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय के तत्वावधान में की गई थी। यह तीनों सेनाओं से संबंधित एक विचार समूह के रूप में कार्य करता है, जहां संयुक्त युद्ध प्रणाली, राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य संसाधनों के प्रभावी उपयोग से जुड़े विषयों पर अनुसंधान, विश्लेषण और विचार-विमर्श किया जाता है।















