काठमांडू, 31 अगस्त।
नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद प्रभावित इलाकों से अब तक 323 से अधिक विदेशी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। दूसरी ओर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 39 देशों के करीब 590 विदेशी नागरिक अभी भी लापता हैं।
नेपाल सरकार ने लापता विदेशी नागरिकों की तलाश के लिए पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ समन्वय तेज कर दिया है। विदेश मंत्रालय में इमरजेंसी कंट्रोल रूम बनाया गया है, जो संबंधित एजेंसियों और लापता लोगों के स्वजन के संपर्क में है। राजनयिक मिशनों के माध्यम से विदेशी नागरिकों से जुड़ी सत्यापित जानकारी लगातार साझा और अद्यतन की जा रही है।
सुरंगों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें भी नेपाल में राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं। भारत के 11 और चीन के 9 विशेषज्ञ नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय कर काम कर रहे हैं। भारतीय दल मेलुंग (चिलिमे) और स्याफ्रुबेसी में, जबकि चीनी टीम अपर त्रिशूली-3ए क्षेत्र में सुरंग बचाव अभियान में सहयोग कर रही है। दक्षिण कोरिया की टीम को भी अभियान में लगाया गया है।
भारत से डीएनए विश्लेषण में विशेषज्ञता रखने वाले 18 फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम 29 अगस्त से नेपाल में मौजूद है। इस संबंध में दोनों देशों के बीच लगातार समन्वय किया जा रहा है।
नेपाल को राहत और बचाव कार्यों के लिए भारत, चीन, जापान, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण कोरिया सहित कई देशों और साझेदारों से महत्वपूर्ण सहायता मिल रही है। सहायता सामग्री में ब्रिज यूनिट, फ्रीजर, जनरेटर, सोलर लैंप, डीएनए जांच किट, टेंट, कंबल, स्लीपिंग बैग, खाद्य सामग्री, दवाइयां और अन्य आपातकालीन उपकरण शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व खाद्य कार्यक्रम और यूनिसेफ जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन भी राहत कार्यों में सहयोग कर रहे हैं। यूएई, म्यांमार, अमेरिका, कतर, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड, मलेशिया और सिंगापुर समेत कई देशों से अतिरिक्त राहत सामग्री भी पहुंचने की प्रक्रिया में है।
बाढ़ से नेपाल के घरों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं सहित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी क्षति पहुंची है। नुकसान का प्रारंभिक आकलन किया जा रहा है और आगे विस्तृत जरूरतों का आकलन किया जाएगा। पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए नेपाल को अंतरराष्ट्रीय सहायता की आवश्यकता पड़ने की संभावना है।
लंबे समय तक पानी में रहने के कारण जिन शवों की पहचान नहीं हो सकी या जो सड़ने की स्थिति में पहुंच गए, उन्हें अस्थायी रूप से दफनाया गया है। इससे पहले मेडिकल टीमों ने प्रत्येक मृतक का डीएनए नमूना लिया, ताकि भविष्य में स्वजन के डीएनए रिकॉर्ड से मिलान कर उनकी पहचान की जा सके।
नेपाल के प्रधानमंत्री स्वयं राहत, बचाव और समन्वय अभियान की निगरानी कर रहे हैं। सरकार देश के भीतर विभिन्न स्तरों पर और पड़ोसी देशों तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है।















