नई दिल्ली, 01 सितंबर।
दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश के बीच लिफ्ट देने के बहाने एक 17 वर्षीय छात्रा के साथ चलती स्लीपर बस में सामूहिक दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने बस चालक कुलदीप और परिचालक संदीप को गिरफ्तार कर लिया है।
घटना चार अगस्त की रात करीब साढ़े 11 बजे की बताई गई है। छात्रा अपने रिश्तेदार से मिलने नोएडा जा रही थी, लेकिन तेज बारिश और अंधेरे के कारण रास्ता भटककर ग्रेटर नोएडा के परी चौक पहुंच गई।
इसी दौरान वहां से गुजर रही एक खाली स्लीपर बस उसके संकेत देने पर रुक गई। चालक और परिचालक ने नोएडा सेक्टर 63 जाने की बात कहते हुए छात्रा को वहां छोड़ने की पेशकश की।
पुलिस के अनुसार, बस चलने के कुछ समय बाद परिचालक ने छात्रा के साथ अशोभनीय हरकतें शुरू कर दीं। आरोप है कि इसके बाद चालक और परिचालक ने चलती बस में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी।
छात्रा के अनुसार, बस सेक्टर 63 पहुंचने के बाद भी चालक ने वाहन नहीं रोका और उसे दिल्ली की ओर ले गया। बाद में बस को आउटर रिंग रोड के रास्ते कश्मीरी गेट आईएसबीटी के पास ले जाया गया।
आरोपितों ने छात्रा को कश्मीरी गेट आईएसबीटी के पास रिंग रोड पर छोड़ दिया और वहां से फरार हो गए। इसके बाद छात्रा ऑटो रिक्शा से कश्मीरी गेट थाने पहुंची और मामले की जानकारी पुलिस को दी।
शिकायत मिलते ही पुलिस ने बस की तलाश के लिए टीमें गठित कीं। छात्रा की मदद से वाहन की पहचान की गई और दोनों आरोपितों को उत्तरी दिल्ली के तिमारपुर स्थित बस पार्किंग से गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने स्लीपर बस को भी जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। बताया गया कि बस में पर्दों से घिरी बर्थ थीं, जिसके कारण वाहन के बाहर से अंदर की गतिविधियां दिखाई नहीं देती थीं।
जांच में सामने आया कि बस में पहले तकनीकी खराबी आ गई थी और उसे मरम्मत के लिए ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित एक कार्यशाला में ले जाया गया था। मरम्मत पूरी होने के बाद कुलदीप और संदीप खाली बस को तिमारपुर वापस ले जा रहे थे, तभी परी चौक पर उनकी मुलाकात छात्रा से हुई।
पुलिस के अनुसार, आरोपित संदीप का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। मामले में पुलिस अब आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी कर रही है।
घटना के बाद महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया। कांग्रेस ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सरकारों पर महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए और पर्याप्त गश्त व जांच व्यवस्था नहीं होने का आरोप लगाया।
आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने भी दिल्ली सरकार की कार्यप्रणाली की आलोचना की और बच्चों से जुड़े अपराधों के मामलों को लेकर सरकार के रवैये पर सवाल खड़े किए।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने बताया कि आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। आयोग ने बच्ची के पुनर्वास, सामाजिक जांच और देखभाल योजना की जानकारी मांगी है।
उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष से स्लीपर कोच बसों में लगाए जाने वाले विभाजनों को लेकर राज्यों को लगातार नोटिस भेजे जा रहे हैं। उनके अनुसार, बसों में इस तरह के विभाजन और चालक केबिन के लिए बनाई गई व्यवस्थाएं केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि नियमों का सख्ती से पालन होने पर ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। आयोग ने सभी राज्यों को दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए फिर नोटिस जारी करने की बात कही है।
मामले में पीड़िता को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। समिति के आदेश के बाद उसे उसके पिता के सुपुर्द कर दिया गया।















