किंशासा, 01 सितंबर।
लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो में इबोला का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। देश में अब तक 6,000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और मृतकों की संख्या करीब 3,000 तक पहुंच गई है।
नए आंकड़ों के अनुसार, यह प्रकोप देश में पहले सामने आई इबोला लहरों से अधिक गंभीर हो गया है। बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं और संक्रमण पर नियंत्रण की कोशिशों के बीच बीमारी तेजी से फैल रही है।
इबोला वायरस के बुंडिबुग्यो प्रकार के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है। यह वायरस देश के विभिन्न हिस्सों में तेजी से संक्रमण फैला रहा है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के अनुसार, मौजूदा प्रकोप अब तक दर्ज किया गया सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला संक्रमण बन गया है। नए मरीजों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ रही है कि अग्रिम मोर्चे पर तैनात स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सभी मामलों का पता लगाना और समय पर कार्रवाई करना मुश्किल हो रहा है।
संक्रमण बढ़ने का एक कारण यह भी बताया गया है कि कई नए मामले ऐसे लोगों में सामने आ रहे हैं, जिनकी संपर्क खोज प्रक्रिया के तहत निगरानी नहीं की जा रही थी।
देश के संचार मंत्रालय के अनुसार, अब तक 6,041 मामलों की पुष्टि हुई है। इनमें 1,366 लोग स्वस्थ हो चुके हैं और 2,911 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 619 मरीज अलगाव में या अस्पतालों में भर्ती हैं।
प्रकोप पर काबू पाने की कोशिशों के सामने कई चुनौतियां हैं। संक्रमण के अधिकतर मामले देश के पूर्वी प्रांतों में केंद्रित हैं, जहां घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सशस्त्र संघर्ष, विस्थापन और पहले से मौजूद मानवीय संकट स्थिति को और कठिन बना रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में भी बाधाएं सामने आ रही हैं। मौजूदा स्वास्थ्य जरूरतों के साथ हवाई अड्डों के बंद होने और उड़ानों पर प्रतिबंध से स्वास्थ्यकर्मियों, जांच सुविधाओं, मरीजों को भेजने की व्यवस्था और आवश्यक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है।
अगस्त की शुरुआत में अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मी भी बकाया वेतन और खराब कार्य परिस्थितियों के विरोध में हड़ताल पर चले गए थे।
उधर, 28 अगस्त को 42 दिनों तक कोई नया मामला सामने नहीं आने के बाद युगांडा को इबोला वायरस से मुक्त घोषित कर दिया गया।














