बिश्केक, 01 सितंबर।
शंघाई सहयोग संगठन के बिश्केक शिखर सम्मेलन में मंगलवार को 28 महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय सहयोग और अन्य अहम क्षेत्रों से जुड़े फैसले शामिल हैं। साथ ही पाकिस्तान के शहर लाहौर को वर्ष 2026-27 के लिए एससीओ की पर्यटन एवं सांस्कृतिक राजधानी घोषित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।
हस्ताक्षरित दस्तावेजों में संगठन की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से जुड़ा बिश्केक घोषणापत्र भी प्रमुख रहा। इसके अलावा एससीओ के मादक पदार्थ-रोधी केंद्र की कार्यकारी समिति के संचालन से संबंधित नियमों को मंजूरी प्रदान की गई। राष्ट्राध्यक्ष परिषद ने परमाणु और भौतिक परमाणु सुरक्षा के क्षेत्र में बहुपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा पर भी हस्ताक्षर किए।
शिखर सम्मेलन में परिवार संस्था के संरक्षण और उसे मजबूत बनाने से संबंधित एक वक्तव्य को स्वीकार किया गया। इसके साथ ही आपात स्थितियों से प्रभावित सदस्य देशों को सहायता उपलब्ध कराने और परस्पर सहयोग बढ़ाने के लिए अलग बयान पर भी सहमति बनी। सदस्य देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास को आगे बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए कई समझौतों को अपनाया।
किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान समेत कई देशों के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया। बिश्केक में इस उच्चस्तरीय बैठक के साथ छठे विश्व घुमंतू खेलों की शुरुआत भी हुई, जिससे यूरेशियाई क्षेत्र के लिए यह सप्ताह कूटनीतिक गतिविधियों से भरा रहा।
सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बिश्केक घोषणापत्र रहा, जिस पर नेताओं ने हस्ताक्षर किए। संगठन के 25 वर्षों की यात्रा और आने वाले समय की दिशा तय करने वाले इस दस्तावेज को विशेष महत्व दिया गया। एससीओ के प्रशासनिक ढांचे को समय के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2002 के संगठनात्मक घोषणापत्र में संशोधनों को भी मंजूरी प्रदान की गई।
सदस्य देश वर्ष 2030 तक सिंथेटिक मादक पदार्थों और इनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई के लिए एक व्यापक कार्यक्रम पर सहमत हुए। अंतरराष्ट्रीय सूचना सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2026 से 2028 तक की विशेष योजना भी स्वीकार की गई। यह निर्णय साइबर खतरों को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच लिया गया।
परमाणु क्षेत्र में राष्ट्राध्यक्ष परिषद ने भौतिक परमाणु सुरक्षा के लिए बहुपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने का संकल्प दोहराते हुए संयुक्त घोषणापत्र को मंजूरी दी। सम्मेलन के एजेंडे में सामाजिक और प्रशासनिक विषयों को भी शामिल किया गया। सदस्य देशों ने परिवार संस्था को सहयोग देने और आपदा या आपात परिस्थितियों से प्रभावित देशों की परस्पर सहायता करने की प्रतिबद्धता जताई।
परिषद ने एससीओ महासचिव और क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे की वार्षिक गतिविधियों से संबंधित रिपोर्टों की भी समीक्षा की। कई पुराने निर्णयों को समाप्त करने के साथ सद्भावना दूत की उपाधि से जुड़े नियमों में बदलाव को औपचारिक मंजूरी दी गई।
इस शिखर सम्मेलन के साथ एससीओ की अध्यक्षता में किर्गिस्तान का महत्वपूर्ण कार्यकाल पूरा हो गया। अब संगठन की बारी-बारी से मिलने वाली अध्यक्षता पाकिस्तान को सौंप दी गई है, जो वर्ष 2027 में राष्ट्राध्यक्ष परिषद की अगली बैठक की मेजबानी करेगा।















