तेहरान, 01 सितंबर।
जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए ताजा ईरानी हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ा जवाब देने का संकेत देते हुए जोरदार हमला करने की चेतावनी दी है।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया है कि ट्रंप की धमकी के बाद उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने पूर्वी होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी एमक्यू-9 ड्रोन को रोक लिया।
करीब एक महीने की शांति के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य गतिविधियां फिर तेज हो गई हैं। आठ अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच शुरुआती संघर्ष विराम लागू होने के बाद से दोनों देशों के बीच कई बार तनावपूर्ण हालात बन चुके हैं।
तनाव बढ़ने पर अमेरिका ने ईरान में कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें 25 मई, 27 मई, 30 मई, 31 मई, 2 जून, 5 जून, 9 जून, 10 जून, 26 जून, 27 जून, 7 जुलाई, 8 जुलाई, 11 से 23 जुलाई और 30 अगस्त को की गई सैन्य कार्रवाई शामिल है।
इन हमलों में रडार ठिकानों, वायु रक्षा प्रणालियों, ड्रोन और मिसाइल सुविधाओं को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इन कार्रवाइयों को ईरानी धमकियों और हमलों के जवाब में उठाया गया कदम बताया।
वाशिंगटन और तेहरान 17 जून को संघर्ष विराम के समझौते पर सहमत हुए थे, लेकिन नियमों के उल्लंघन के बाद दोनों पक्षों के बीच फिर टकराव शुरू हो गया। बाद में राष्ट्रपति ट्रंप ने इस समझौते को रद्द घोषित कर दिया।
जुलाई में संघर्ष ने गंभीर रूप ले लिया और कई रातों तक लगातार सैन्य कार्रवाई होती रही। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और कतर में अमेरिकी सेना से जुड़े ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही में भी बाधा पहुंचाई गई। इसके बाद अमेरिका ने 30 अगस्त को लराक द्वीप पर ईरान के दो लॉन्चरों को निशाना बनाया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने जॉर्डन में अमेरिकी कर्मियों पर हुए ईरानी हमलों का जवाब देने का वादा किया। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका ईरान पर जोरदार हमला करेगा।
ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य सुरक्षित है और अब तक की कार्रवाई में ईरान के वित्तीय तंत्र, सेना और नेतृत्व को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका आगे हमला नहीं करेगा।
इसी बीच यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से निकलते समय ओमान के खसाब के पास एक टैंकर पर तीन अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया। ये मिसाइल या रॉकेट जैसे हथियार हो सकते हैं।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने ईरानी तेल पर अमेरिकी रोक को बड़ी जीत बताया। उनका कहना है कि इस कदम का ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है और इसे जारी रखा जाना चाहिए।
बोल्टन ने कहा कि यह रोक ईरान को तेल और अन्य वस्तुओं के निर्यात से रोकने में काफी प्रभावी रही है। उनके अनुसार, यदि युद्ध की शुरुआत से ही इसे लागू किया जाता तो इसका असर और अधिक होता।
उन्होंने चीन को वाशिंगटन के दबाव अभियान के सामने मुख्य चुनौती बताया। बोल्टन ने कहा कि चीन लंबे समय से ईरानी तेल का बड़ा खरीदार रहा है और अपने बैंकिंग तंत्र के माध्यम से ईरान को वित्तीय संपत्तियां हस्तांतरित करने में मदद करता रहा है।
उनका कहना था कि ईरान को आर्थिक मदद देने वाले देशों और विशेष रूप से चीन के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ जारी टकराव को अमेरिका के लिए काफी छोटी लड़ाई बताया। ओवल ऑफिस में उन्होंने ईरान को लेकर जताई गई चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि यह कोई बड़ी लड़ाई नहीं है।
ट्रंप ने ईरान को एक नाकाम देश भी बताया। इसी बीच सेना की 82वीं एयरबोर्न यूनिट के परिवारों को जानकारी दी गई कि मध्य पूर्व में उसकी तैनाती 2027 तक जारी रहेगी।
नॉर्थ कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग स्थित 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के अधिकारियों ने रविवार को लिखे पत्र में बताया कि तैनाती की कुल अवधि 12 महीने तक रहने की उम्मीद है। मेजर जनरल ब्रैंडन टेगटमेयर और कमांड सार्जेंट मेजर जेम्स ब्रैडशॉ ने पत्र में यह जानकारी दी।
इस बीच यह भी बताया गया कि ट्रंप मंगलवार को तेल रिफाइनर और डिस्ट्रीब्यूटर से मुलाकात करेंगे। बैठक में छोटे, मध्यम और बड़े रिफाइनर तथा डिस्ट्रीब्यूटर के साथ आंतरिक सचिव डग बर्गम और ऊर्जा सचिव क्रिस राइट भी शामिल होंगे।
वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के नए आर्थिक दबाव अभियान का उद्देश्य ईरान को फिर बातचीत की मेज तक लाना है। दुनिया की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के वित्तमंत्रियों के साथ नॉर्थ कैरोलिना में हुई बैठक के दौरान उन्होंने यह बात कही।
बेसेंट ने कहा कि ऐसे हालात तैयार करना लक्ष्य है, जिनमें ईरान खुद बातचीत के लिए आगे आए। उनके अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप का रुख स्पष्ट है कि ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ना होगा और जलडमरूमध्य को खुला रखना होगा।















