नई दिल्ली, 01 सितंबर।
भारत की वायु रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में रूस से पांच अतिरिक्त एस-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियां खरीदने की पेशकश सामने आई है। भारतीय सेना में इस शक्तिशाली प्रणाली को ‘सुदर्शन’ नाम दिया गया है। भारत के पास पहले से इस प्रणाली की चार इकाइयां मौजूद हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, एस-400 प्रणाली के प्रदर्शन को देखते हुए पांच और स्क्वाड्रन खरीदने का निर्णय किया गया है। पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ने इस प्रणाली की क्षमता का उल्लेख करते हुए बताया कि इसने 314 किलोमीटर की रिकॉर्ड दूरी पर पाकिस्तान के एक निगरानी विमान को मार गिराया था।
किर्गिस्तान में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात में रक्षा तथा ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा हुई। इसी दौरान रूस की ओर से भारत को पांच अतिरिक्त एस-400 प्रणालियां उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया।
भारत ने वर्ष 2018 में पांच एस-400 इकाइयों की खरीद का करार किया था। इनमें से चार प्रणालियां भारत को मिल चुकी हैं और पांचवीं इकाई के नवंबर तक मिलने की उम्मीद है। नई खरीद का करार होने पर हस्ताक्षर के करीब तीन वर्ष बाद इन प्रणालियों की आपूर्ति शुरू हो सकती है। इन्हें भारत की पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं पर तैनात करने की योजना है।
रूस ने एस-400 के अलावा भारत के समक्ष अन्य रक्षा सहयोग के प्रस्ताव भी रखे हैं। इनमें एस-500 प्रोमेथियस मिसाइल प्रणाली का संयुक्त उत्पादन, सुखोई-57ई स्टेल्थ लड़ाकू विमान, कैलिबर क्रूज मिसाइलों से लैस किलो श्रेणी की पनडुब्बी तथा सुखोई-30 विमानों को ‘सुपर सुखोई’ स्तर तक उन्नत करने का कार्यक्रम शामिल है।
इन प्रस्तावों से भारत की वायु रक्षा और सैन्य क्षमता को सीमावर्ती क्षेत्रों में और अधिक मजबूती मिलने की संभावना है।















