नई दिल्ली, 01 सितंबर।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान देश की आत्मा और अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ हैं। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर किसानों के कल्याण के लिए एकजुट होकर काम कर रही हैं, ताकि खेतों तक सिंचाई, बेहतर बीज, कृषि यंत्र और आधुनिक डिजिटल सुविधाओं का लाभ पहुंचाया जा सके।
मंगलवार को कृषि मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में चौहान ने उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु और त्रिपुरा के कृषि मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की। बैठक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर और समृद्ध किसान के संकल्प को तेजी से लागू करने की दिशा में आयोजित की गई।
कृषि मंत्री ने पांच राज्यों के कृषि विकास के लिए दूसरी मदर सैंक्शन के रूप में कुल 1,283.11 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति जारी की। यह राशि पीएम-आरकेवीवाई और कृषोन्नति योजना के अंतर्गत कृषि क्षेत्र को नई गति देने के लिए मंजूर की गई है।
आंध्र प्रदेश को सबसे अधिक 409.40 करोड़ रुपये मिले हैं, जिसमें पीएम-आरकेवीवाई के लिए 296.09 करोड़ और कृषोन्नति योजना के लिए 113.31 करोड़ रुपये शामिल हैं। राज्य में सूक्ष्म सिंचाई और कृषि यंत्रीकरण के क्षेत्र में किए गए कार्यों की सराहना की गई।
तमिलनाडु के लिए 355.88 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसमें पीएम-आरकेवीवाई के तहत 251.79 करोड़ और कृषोन्नति योजना के लिए 104.09 करोड़ रुपये शामिल हैं। बैठक में सूक्ष्म सिंचाई और तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयासों पर चर्चा हुई।
ओडिशा को कुल 219.65 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसमें पीएम-आरकेवीवाई के लिए 117.94 करोड़ और कृषोन्नति योजना के लिए 101.71 करोड़ रुपये शामिल हैं। कृषि यंत्रीकरण और कृषि विस्तार में धनराशि के प्रभावी उपयोग को सराहा गया।
उत्तराखंड को कृषि अधोसंरचना और प्राकृतिक खेती को मजबूत करने के लिए 106.67 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसमें पीएम-आरकेवीवाई के 65.78 करोड़ और कृषोन्नति योजना के 40.89 करोड़ रुपये शामिल हैं। राज्य ने परंपरागत कृषि विकास योजना और बागवानी क्षेत्र में प्रगति की जानकारी दी।
त्रिपुरा के लिए 91.51 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इस राशि से बांस मिशन, तेल पाम और कृषि यंत्रीकरण को मजबूती मिलेगी। इसमें पीएम-आरकेवीवाई के 36.51 करोड़ तथा कृषोन्नति योजना के 55 करोड़ रुपये शामिल हैं।
इस वित्तीय सहायता से राज्यों में सूक्ष्म सिंचाई, जल संरक्षण और उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों को गति मिलेगी। छोटे किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों पर अनुदान का लाभ दिया जाएगा। मिट्टी की जांच, डिजिटल कृषि सेवाओं, दलहन, तिलहन और बागवानी मिशनों के माध्यम से फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। चौहान ने राज्यों से धनराशि का तेजी से उपयोग सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि पात्र किसानों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंच सके।















