भोपाल, 01 सितंबर।
मध्य प्रदेश सरकार ने तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को तीन अलग-अलग प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालयों में विभाजित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। नए विश्वविद्यालय भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में स्थापित किए जाएंगे।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि तकनीकी शिक्षा के विस्तार, क्षेत्रीय संतुलन और बेहतर अधोसंरचना को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया गया है। भोपाल स्थित वर्तमान विश्वविद्यालय का नाम मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय होगा। उज्जैन के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय और जबलपुर के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा।
वर्तमान में विश्वविद्यालय से 13 पाठ्यक्रम, 585 संस्थान और 3 लाख 83 हजार से अधिक विद्यार्थी जुड़े हैं। नई व्यवस्था में तकनीकी महाविद्यालयों को संभागवार तीनों विश्वविद्यालयों के बीच बांटा जाएगा। मध्य भारत विश्वविद्यालय के अंतर्गत भोपाल, नर्मदापुरम, चंबल और ग्वालियर संभाग आएंगे। मालवा विश्वविद्यालय में उज्जैन और इंदौर संभाग शामिल होंगे। महाकौशल विश्वविद्यालय के अधीन जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों के तकनीकी संस्थान रहेंगे। तीनों के लिए अलग-अलग अधिनियम लागू किए जाएंगे।
उज्जैन और जबलपुर में स्थापित होने वाले विश्वविद्यालयों के शुरुआती प्रशासनिक संचालन के लिए कुलगुरु, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, उप कुलसचिव और वित्त अधिकारी के पद स्वीकृत किए गए हैं। अन्य सहायक एवं तकनीकी पद नियमानुसार बाहरी सेवाओं के माध्यम से भरे जाएंगे। प्रारंभिक चरण में इन पदों का वेतन विश्वविद्यालयों की उपलब्ध राशि से दिया जाएगा और संस्थान स्व-वित्तीय आधार पर संचालित होंगे।
सरकार ने स्थापना और आगे की प्रक्रिया को गति देने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय साधिकार समिति गठित करने की मंजूरी भी दी है। इसमें तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार, वित्त, उच्च शिक्षा और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव शामिल होंगे। मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय के कुलगुरु तथा आयुक्त तकनीकी शिक्षा को भी समिति में जिम्मेदारी दी गई है।
मंत्रि-परिषद ने रबी विपणन वर्ष 2026 में मूंग और उड़द के उपार्जन से जुड़े मुख्यमंत्री के निर्णय का अनुसमर्थन किया। वर्ष 2025-26 में ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन के लिए पहले पंजीकृत किसानों से उत्पादन का 25 प्रतिशत खरीदने का प्रावधान था, जिसे संशोधित कर 60 प्रतिशत तक कर दिया गया।
बैठक में स्वास्थ्य संस्थाओं में मशीनों और उपकरणों के रखरखाव की योजना को एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए 488 करोड़ 41 लाख रुपये मंजूर किए गए। चिकित्सा संस्थानों की विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए इसी अवधि में 915 करोड़ 77 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसके तहत मॉड्यूलर किचन, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर सहित अन्य सुविधाओं की मरम्मत की जाएगी।
मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जिला कार्यालयों के लिए कुल 15 नए नियमित पद सृजित करने की मंजूरी दी गई। प्रत्येक जिले में उप संचालक का एक, सहायक वर्ग-2 का एक और सहायक वर्ग-3 के तीन पद होंगे। प्रत्येक जिले के लिए दो-दो चतुर्थ श्रेणी मानव संसाधन बाहरी सेवाओं से लिए जाएंगे।
निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में जिला आयुष कार्यालयों के संचालन के लिए 20 पदों के सृजन को भी मंजूरी मिली। इनमें जिला आयुष अधिकारी, सहायक ग्रेड-1 मुख्य लिपिक, लेखापाल और सहायक ग्रेड-2 के पद शामिल हैं।
मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के विकास और अधोसंरचना से जुड़े 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों तथा जनकल्याणकारी निर्णयों को स्वीकृति दी। विकसित भारत: वीबी जी राम जी योजना के लिए 29 हजार 619 करोड़ रुपये के प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया गया। पश्चिम भोपाल बायपास के चार लेन निर्माण के लिए 3 हजार 774 करोड़ रुपये और मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथोन मार्ग के लिए 3 हजार 272 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।
राज्य में दुग्ध उत्पादकों को आर्थिक मजबूती देने और सांची ब्रांड के उन्नयन के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से 2 हजार 973 करोड़ रुपये की डेयरी विकास योजना को भी मंजूरी प्रदान की गई है।















