नई दिल्ली, 01 सितंबर।
भारतीय रेलवे ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, सिग्नलिंग प्रणाली के आधुनिकीकरण और माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने के लिए तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन योजनाओं पर कुल 675 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
समस्तीपुर मंडल के 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग लगाने के लिए 233 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। दक्षिण पूर्व रेलवे में अद्रा-जॉयचंडीपहाड़-सांका बाईपास लाइन के लिए 272 करोड़ रुपये और मुरादाबाद मंडल में कवच 4.0 प्रणाली के लिए 170 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
रेलवे के अनुसार, इन परियोजनाओं से पुराने सिग्नलिंग तंत्र को आधुनिक बनाया जाएगा। साथ ही ट्रेन परिचालन की सुरक्षा बढ़ाने और मालगाड़ियों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाने पर जोर रहेगा।
पूर्व मध्य रेलवे के समस्तीपुर मंडल में 21 स्टेशनों की मौजूदा पैनल इंटरलॉकिंग को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली से बदला जाएगा। इस परियोजना पर 233 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
कंप्यूटर आधारित यह आधुनिक व्यवस्था पुराने रिले आधारित तंत्र की तुलना में अधिक विश्वसनीय होगी। इससे तकनीकी खराबियों की पहचान, रखरखाव और परिचालन में अधिक सुविधा मिलने की उम्मीद है।
इस परियोजना से संबंधित स्टेशनों पर सिग्नलिंग व्यवस्था मजबूत होगी और कवच प्रणाली लागू करने के लिए आवश्यक आधुनिक बुनियादी ढांचा भी तैयार किया जाएगा।
दक्षिण पूर्व रेलवे में अद्रा छोर से जॉयचंडीपहाड़ के बीच 11 किलोमीटर लंबी बाईपास लाइन बनाने को मंजूरी दी गई है। इस योजना पर 272 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
अद्रा-जॉयचंडीपहाड़-सांका बाईपास बनने से मौजूदा परिचालन बाधाएं और सतही क्रॉसिंग के कारण होने वाली देरी कम होने की उम्मीद है। यह बाईपास आगामी तीसरी लाइन से दोनों दिशाओं में संपर्क उपलब्ध कराएगा और मालगाड़ियों के लिए अलग मार्ग सुनिश्चित करेगा।
इस परियोजना से प्रतिदिन अनुमानित 6.065 मालगाड़ियों की आवाजाही को सुविधा मिलेगी। इसके पूरा होने पर अतिरिक्त 8.88 एमटीपीए माल यातायात संभालने की क्षमता विकसित होने की उम्मीद है।
यह परियोजना ऊर्जा, खनिज और सीमेंट गलियारे का हिस्सा है तथा सेल और बीसीसीएल से जुड़े बढ़ते औद्योगिक माल परिवहन को समर्थन देगी।
उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल के शेष 712 रूट किलोमीटर में कवच संस्करण 4.0 लगाने के लिए 170 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच परिचालन के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती है। यह सिग्नल पार करने की खतरनाक स्थिति को रोकने, जरूरत पड़ने पर स्वचालित ब्रेक लगाने और संवेदनशील परिस्थितियों में ट्रेन की गति नियंत्रित करने में मदद करती है।
इस परियोजना का उद्देश्य रेल दुर्घटनाओं और टक्कर के जोखिम को कम करना तथा रेलवे नेटवर्क में कवच प्रणाली का विस्तार करना है।














