काठमांडू, 01 सितंबर। नेपाल के भौतिक पूर्वाधार विकास मंत्रालय ने रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी की बाढ़ से प्रभावित लोगों को फिर से सामान्य जीवन की ओर लौटाने के लिए एक विशेष कार्यदल का गठन किया है।
मंत्रालय के अनुसार, इस कार्यदल को 21 दिनों के भीतर प्रारंभिक पुनर्स्थापना और जरूरी प्रबंधन से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है।
कार्यदल प्रभावित इलाकों में सड़क, पुल, पेयजल, पुनर्वास, झोलुंगे पुल, मलबा प्रबंधन, संचार और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े आवश्यक कार्यों की पहचान करेगा। साथ ही इनके समन्वय और क्रियान्वयन में भी सहयोग करेगा।
इस काम के लिए संबंधित संस्थाओं और एजेंसियों को सक्रिय किया जाएगा। कार्यों की नियमित निगरानी करने के साथ उनकी प्रगति की रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी।
मंत्रालय ने बताया कि कार्यदल सभी संबंधित निकायों के बीच समन्वय स्थापित कर प्रभावित क्षेत्रों में जल्द पुनर्स्थापना का काम आगे बढ़ाएगा। इसका उद्देश्य जरूरी बुनियादी ढांचे को दोबारा संचालित करना और प्रभावित नागरिकों को सामान्य जनजीवन में वापस लाना है।
कार्यदल की प्रमुख जिम्मेदारियां1. आपदा से हुए नुकसान और संभावित जोखिमों का शीघ्र तकनीकी तथा वस्तुनिष्ठ आकलन करना।
2. तत्काल शुरू होने वाले आपातकालीन पुनर्स्थापना कार्यों और जरूरी सेवाओं की पहचान कर संबंधित निकायों को सक्रिय करना।
3. प्रभावित क्षेत्रों, संरचनाओं और परिवारों को जोखिम तथा प्राथमिकता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखना।
4. तत्काल, अल्पकालीन और दीर्घकालीन स्तर की कार्ययोजनाएं तैयार करना।
5. आवश्यक जनशक्ति, उपकरण, सामग्री और वित्तीय संसाधनों की जरूरत का निर्धारण करना।
6. संघ, प्रदेश और स्थानीय निकायों के साथ सुरक्षा एजेंसियों, निजी क्षेत्र तथा विकास साझेदारों के बीच समन्वय स्थापित करना।
7. पुनर्निर्माण के दौरान भूगर्भीय परिस्थितियों, जलवायु परिवर्तन, बाढ़, भूस्खलन और अन्य आपदा जोखिमों को ध्यान में रखते हुए बेहतर तरीके से पुनर्निर्माण के सिद्धांत को अपनाना।
8. जरूरी नीतिगत, कानूनी, प्रशासनिक और बजट संबंधी निर्णयों के लिए संबंधित निकायों तथा प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद कार्यालय को आवश्यक सिफारिशें देना।
9. कार्यों की प्रगति, सामने आने वाली समस्याओं और उनके समाधान के उपायों के साथ नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत करना।
10. कार्यदल के दायरे में आने वाले कार्यों की निगरानी, मूल्यांकन और गुणवत्ता सुनिश्चित करना।
11. आपदा के बाद पुनर्स्थापना कार्यों से मिले अनुभव और आंकड़ों के आधार पर भविष्य की आपदाओं का जोखिम कम करने के लिए जरूरी नीतिगत सुझाव देना।















