फरीदकोट, 02 सितंबर।
नाबालिग अवस्था में बिना वैध पासपोर्ट के भारत में प्रवेश करने वाले एक पाकिस्तानी नागरिक को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बुधवार को पाकिस्तान वापस भेज दिया गया। युवक जून 2024 में फरीदकोट-फिरोजपुर सीमा क्षेत्र से भारतीय सीमा में दाखिल हुआ था। उसकी स्वदेश वापसी की प्रक्रिया में जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण, फरीदकोट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जानकारी के मुताबिक युवक जून 2024 में फिरोजपुर सीमा के रास्ते भारत पहुंचा था। उसे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड, फिरोजपुर के समक्ष पेश किया गया था। करीब एक वर्ष बाद वर्ष 2025 में उसके मामले का निर्णय हुआ। हिरासत के दौरान उसके बालिग होने पर उसे फरीदकोट के ऑब्जर्वेशन होम के अलग और सुरक्षित परिसर में रखा गया।
कानूनी सजा पूरी होने तथा अन्य जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद विदेश मंत्रालय से उसे पाकिस्तान भेजने की मंजूरी मिली। इसके बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा डीएलएसए के अध्यक्ष संजय अग्निहोत्री ने युवक की स्वदेश वापसी की प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दिए।
डीएलएसए की सचिव एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गुरप्रीत कौर की निगरानी में पूरी कार्रवाई संपन्न हुई। फरीदकोट ऑब्जर्वेशन होम के अधीक्षक और कर्मचारियों ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच युवक को अटारी सीमा तक पहुंचाया, जहां उसे पाकिस्तानी रेंजर्स के सुपुर्द कर दिया गया।
पाकिस्तान रवाना होने से पहले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने युवक को मिठाई, फल और कपड़े दिए तथा उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने उसे किसी भी गैरकानूनी गतिविधि से दूर रहने और बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के अंतरराष्ट्रीय सीमा पार नहीं करने की सलाह भी दी।
फरीदकोट क्षेत्र में इस प्रकार का यह पहला मामला नहीं है। अप्रैल 2024 में भी इसी आयु वर्ग के दो पाकिस्तानी लड़कों को कानूनी प्रक्रिया और सजा पूरी होने के बाद पाकिस्तान वापस भेजा गया था। अधिकारियों के अनुसार, सीमा पार से जुड़े मामलों में सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद ही संबंधित नागरिकों को उनके देश भेजा जाता है।















