रसुवागढ़ी, 2 सितंबर।
नेपाल के रसुवागढ़ी में हाल ही में आई तबाही का मुख्य कारण बने ग्लेशियर के खिसकने की घटना बेहद भयावह थी। जानकारों के अनुसार इस हादसे के दौरान करीब ढाई करोड़ घन मीटर बर्फ पहाड़ से नीचे गिरी।
त्रिभुवन विश्वविद्यालय के भूगर्भ विशेषज्ञों ने सैटेलाइट आंकड़ों के आधार पर बताया है कि यह मलबा करीब दो हजार मीटर की ऊंचाई से नीचे आ गिरा था। इस दौरान पैदा हुई जबरदस्त ऊर्जा का असर किसी बड़े बम धमाके जैसा था।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस विशाल हिमस्खलन के कारण भारी कंपन दर्ज किया गया था जो रिक्टर स्केल पर पांच दशमलव दो तीव्रता के भूकंप के बराबर था।
अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के कई भूगर्भशास्त्री पिछले एक साल से हिमालयी क्षेत्रों की इन गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए थे। अनुसंधान के दौरान तिब्बती सीमा के ऊपरी हिस्से में स्थित हिमताल के छोटे तालाबों के फटने की बात सामने आई थी।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस खिसके हुए बर्फीले हिस्से की लंबाई लगभग एक दशमलव तीन किलोमीटर आंकी गई है। शुरुआती आकलन में यह बात भी सामने आई है कि गिरा हुआ बर्फ का यह ढेर साठ से सत्तर मीटर तक मोटा था।
वैज्ञानिकों ने इस विशाल मात्रा को समझाने के लिए बताया कि यह आयतन लंदन के प्रसिद्ध स्टेडियम को बाईस बार भरने और मिस्र के पिरामिड से दस गुना अधिक है।
अध्ययन कर रहे जानकारों का मानना है कि वास्तविक रूप से नीचे आई बर्फ की कुल मात्रा इन शुरुआती अनुमानों से कहीं ज्यादा भी हो सकती है।















