काठमांडू, 2 सितंबर।
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत से मिली सहायता को लेकर प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में भारत के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार आपदा की शुरुआत से ही अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से राहत और बचाव कार्यों को आगे बढ़ा रही है और इतनी बड़ी त्रासदी में बाहरी सहयोग लेने से पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है।
प्रधानमंत्री ने संसद में कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर समन्वय के साथ लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने सरकार पर राहत कार्यों में देरी और अंतरराष्ट्रीय मदद लेने में हिचकिचाहट के आरोपों को भी खारिज किया।
नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ के बाद स्थिति गंभीर बनी हुई है। इस आपदा में अब तक 1127 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और चार हजार से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बालेन शाह से बातचीत कर सहायता का भरोसा दिया था।
इसके बाद भारत की ओर से नेपाल को लगातार राहत सामग्री भेजी जा रही है। सहायता में खाद्य सामग्री, दवाइयां, पुल निर्माण से जुड़ा सामान और विशेषज्ञों की टीम भी शामिल है। भारत से मिल रही इस मदद को राहत एवं बचाव कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने आपदा के दौरान लोगों तक समय पर जानकारी नहीं पहुंचाने के आरोपों पर भी अपनी सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि बाढ़ की जानकारी मिलते ही करीब 11 लाख नागरिकों को संदेश के माध्यम से चेतावनी और आवश्यक सूचनाएं भेजी गईं।
उन्होंने कहा कि यह आपदा अनुमान से कहीं अधिक गंभीर थी, लेकिन सरकार को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, लोगों को तत्काल सूचित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। राज्य और स्थानीय स्तर पर समन्वय की कमी से जुड़े सवालों पर भी प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी स्तरों पर लगातार संपर्क बनाए रखा गया है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, राहत और बचाव अभियान विभिन्न सरकारी इकाइयों के बीच समन्वय से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों को बाहर निकालने के अभियान का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यह अत्यंत तकनीकी और जटिल बचाव कार्य है।
उन्होंने बताया कि इस अभियान में संबंधित स्तरों की टीमें शुरुआत से जुटी हुई हैं और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर बचाव कार्य लगातार चलाया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने और फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं।















