नेपाल, 2 सितंबर।
बाढ़ से प्रभावित नेपाल में भारत ने राहत और बचाव सहायता तेज करते हुए आपातकालीन सामग्री की पांचवीं खेप भेजी है। राहत सामग्री लेकर पांचवां भारतीय विमान बुधवार दोपहर नेपाल पहुंचा। इस विमान में सुरंग बचाव के विशेष उपकरणों से सुसज्जित 11 सदस्यीय दल और साढ़े पांच टन आवश्यक दवाएं भेजी गई हैं।
नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट पिछले महीने 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के ढहने अथवा हिमस्खलन के कारण अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई थी। इसके बाद से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
भारतीय वायु सेना ने जरूरतमंद इलाकों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाने के लिए कई उड़ानें संचालित की हैं। भारत ने विशेष खोज एवं बचाव सहायता भी उपलब्ध कराई है। भारतीय दल पनबिजली सुरंगों के आसपास चल रहे अभियानों में सहयोग कर रहे हैं और बड़ी संख्या में मृतकों तथा लापता लोगों की पहचान के लिए न्यायालयिक जांच संबंधी प्रयासों में भी शामिल हैं।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने संसद में विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत की त्वरित सहायता के लिए आभार व्यक्त किया। बचाव दल सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में जीवित बचे लोगों और लापता नागरिकों की तलाश में जुटे हैं। इस आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 1,204 हो गई है और लगभग 4,216 लोग अब भी लापता बताए गए हैं।
बचावकर्मी लगातार बारिश और मलबे के बीच उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं, जिनके भोटेकोशी नदी के मार्ग पर स्थित सुरंगों और भूमिगत बिजली संयंत्रों में फंसे होने की आशंका है। प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि इस आपदा ने हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते खतरों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ इस त्रासदी को उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन से जोड़ रहे हैं। उनके अनुसार जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना और उनसे उत्पन्न जोखिमों का प्रबंधन वैश्विक समुदाय की साझा जिम्मेदारी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिले इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और पूरे देश को इसका गंभीर झटका लगा है। प्रभावित इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों को तैनात किया गया है तथा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है। सेना के हेलीकॉप्टर बचाव और निकासी अभियान चला रहे हैं तथा जरूरत पड़ने पर निजी हेलीकॉप्टर भी तैयार रखे गए हैं।
सरकार ने पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता को मंजूरी दी है और प्रभावित क्षेत्रों को तीन महीने के लिए संकटग्रस्त घोषित किया गया है। घायलों को निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है, वहीं विस्थापित लोगों के लिए भोजन और आश्रय की व्यवस्था की जा रही है।
स्थानीय और प्रांतीय प्रशासन बिजली, पेयजल और परिवहन संपर्क बहाल करने के लिए संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। नेपाल को भारत सहित चीन, अमेरिका, जापान, एशियाई विकास बैंक, विश्व बैंक, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों एवं बहुपक्षीय संस्थाओं से सहायता और समर्थन मिला है।
प्रधानमंत्री राहत कोष में अब तक 7 अरब नेपाली रुपये से अधिक की राशि एकत्र हो चुकी है। बचाव दल जोखिम वाले क्षेत्रों से परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, मलबे से बंद सड़कों को खोलने और स्थानीय प्रशासन के साथ राहत एवं खोज अभियान चलाने में जुटे हैं। हालांकि लगातार बारिश के कारण रसुवा और नुवाकोट में बचाव कार्य प्रभावित हो रहा है।















