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संपादकीय
02 Sep, 2026

धर्म का भेद मिटाए मानवता का सेतु: न्यूयार्क से उठा वसुधैव कुटुंबकम का स्वर और मोहन भागवत का एकता मंत्र

न्यूयार्क में मोहन भागवत ने सत्य के अनेक मार्गों और मानवता की एकता का संदेश देते हुए धर्म को विभाजन की दीवार नहीं, बल्कि दुनिया को जोड़ने वाला सेतु बताया।

न्यूयार्क, 02 सितंबर।

आज जब पूरी दुनिया धर्म, भाषा और सरहदों के नाम पर बंटी हुई दिखाई देती है, तब न्यूयार्क की धरती से भारत की एक पुरानी आवाज फिर गूंजी है। यह आवाज है कि धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी के मंच से यही बात कही है। यह केवल एक भाषण नहीं है, बल्कि भारतीय चिंतन का सार है, जो हजारों वर्षों से इस धरती पर जीवित है।

सत्य एक है, अभिव्यक्ति अनेक है। भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि सत्य एक है, लेकिन अलग-अलग लोग अपनी समझ और दृष्टिकोण के अनुसार उसे अलग-अलग तरीके से व्यक्त करते हैं। हम सब एक ही सॉफ्टवेयर के कैदी हैं, जो हमारे दिमाग में बना है। यानी हमारी परवरिश, हमारी संस्कृति और हमारा अनुभव ही तय करता है कि हम ईश्वर को किस रूप में देखते हैं। कोई उसे मंदिर में देखता है, कोई मस्जिद में और कोई चर्च में, लेकिन देखने वाला दिल तो एक ही है।

उन्होंने कहा कि वे स्वयं कोई धार्मिक विद्वान या धार्मिक अथॉरिटी नहीं हैं, लेकिन जिस समाज में वे काम करते हैं, उसकी परंपरा यह मानती है कि पूजा पद्धतियां अलग हो सकती हैं, पर मानवता की जड़ एक ही है। यही भारत का वह विचार है, जिसने कभी भी किसी को अपने धर्म से बाहर नहीं किया, बल्कि सबको अपने भीतर समा लिया।

2018 के उस सवाल का जवाब, जो आज भी प्रासंगिक है। अपने भाषण में भागवत ने 2018 में नई दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम का जिक्र किया। वहां कुछ मुस्लिम नागरिकों ने उनसे पूछा था कि आप हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं, क्या इसका मतलब है कि मुस्लिमों को देश से बाहर निकाल दिया जाएगा? तब उन्होंने कहा था, नहीं, यह हिंदुत्व नहीं है। अगर कोई यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होना चाहिए तो वह असल में हिंदू नहीं है। यह वाक्य आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना तब था। हिंदू राष्ट्र का अर्थ अक्सर गलत समझा जाता है। कुछ लोग इसे किसी धर्म विशेष के शासन से जोड़ देते हैं, जबकि इसका अर्थ सांस्कृतिक एकता से है। हिंदुत्व कोई पूजा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है, जो कहती है कि सब अपने-अपने तरीके से सत्य तक पहुंच सकते हैं और सबका सम्मान होना चाहिए। भारत में सदियों से यही परंपरा रही है कि यहां सभी धर्म फलते-फूलते रहे हैं। यही कारण है कि भारत को धर्मशाला कहा गया है, जहां हर विचार के लिए जगह है।

वसुधैव कुटुंबकम से वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी तक का सफर। भारत के प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है कि वसुधैव कुटुंबकम यानी पूरी धरती ही एक परिवार है। आज इसी विचार का आधुनिक रूप वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी है। जब भागवत न्यूयार्क में इस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे तो उनके शब्दों में यही भाव था कि दुनिया भले ही तकनीक से ग्लोबल विलेज बन गई हो, लेकिन दिलों में अभी भी दीवारें हैं। उन दीवारों को गिराना होगा। उन्होंने कहा कि आज धर्मों को काफी हद तक रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों के आधार पर परिभाषित किया जाता है। अनुष्ठान महत्वपूर्ण हो सकते हैं। वे व्यक्ति को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ाने का माध्यम बन सकते हैं, लेकिन वे लक्ष्य नहीं हैं। लक्ष्य है इंसान को बेहतर इंसान बनाना और समाज को जोड़ना। यदि अनुष्ठान ही धर्म बन जाए तो फिर धर्म बंटवारे का कारण बन जाता है।

दुनिया जल रही है, तब यह संदेश क्यों जरूरी है? आज की दुनिया की हकीकत क्या है? ईरान में छह महीने से युद्ध चल रहा है, समाधान निकलता नहीं दिख रहा। गैस की ऊंची कीमतों से दुनिया जूझ रही है। अमेरिका में राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ रहा है, यूरोप में शरणार्थी संकट है और एशिया में धार्मिक टकराव की खबरें आती रहती हैं। ऐसे में यदि कोई कहे कि धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है तो यह केवल आदर्शवाद नहीं, बल्कि जीने का व्यावहारिक मंत्र है। जब धर्म के नाम पर हिंसा होती है तो असल में धर्म की हार होती है और अहंकार की जीत होती है। धर्म तो जोड़ने के लिए होता है, तोड़ने के लिए नहीं। यदि हम यह मान लें कि मेरा रास्ता ही एकमात्र सही रास्ता है तो फिर संवाद खत्म हो जाता है और संघर्ष शुरू हो जाता है। लेकिन यदि हम यह मान लें कि सत्य एक है और रास्ते अनेक हैं तो फिर संवाद की गुंजाइश बनती है और यही संवाद शांति की नींव है।

मोहन भागवत की यह यात्रा तीन देशों की वैश्विक यात्रा का पहला चरण है और इसकी शुरुआत अमेरिका से हुई है। यह संयोग नहीं है कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब दुनिया भारत की ओर देख रही है। भारत वह देश है, जिसने कभी किसी दूसरे देश पर धर्म के नाम पर आक्रमण नहीं किया, जिसने कभी किसी को अपना धर्म मानने के लिए मजबूर नहीं किया और जिसने हमेशा कहा कि एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति यानी सत्य एक है, विद्वान उसे अलग-अलग नामों से पुकारते हैं।

आज दुनिया को इसी ज्ञान की जरूरत है। पश्चिमी दुनिया ने वन वर्ल्ड का सपना तो देखा, लेकिन उसे बाजार और व्यापार से जोड़ दिया। भारत कह रहा है कि वन वर्ल्ड तभी बनेगा, जब वन ह्यूमैनिटी का भाव जगेगा। जब तक दिल नहीं जुड़ेंगे, तब तक बाजार नहीं जुड़ सकता।

धर्म और मानवता में कोई टकराव नहीं है। टकराव है संकीर्णता और उदारता में, टकराव है अहंकार और विनम्रता में। मोहन भागवत का संदेश हमें याद दिलाता है कि पूजा पद्धति बदल सकती है, भाषा बदल सकती है, रीति-रिवाज बदल सकते हैं, लेकिन भूख, प्यास, प्रेम, करुणा और पीड़ा सबकी एक जैसी है और इसी एक जैसी भावना का नाम मानवता है। यदि हम इस एकता को समझ लें तो धर्म हमारे लिए बोझ नहीं, बल्कि उत्सव बन जाएगा और यदि हम इसे न समझें तो धर्म के नाम पर दुनिया जलती रहेगी। इसलिए जरूरत है कि हम धर्म को दीवार न बनाकर सेतु बनाएं और यही सेतु हमें एक बेहतर दुनिया की ओर ले जाएगा, जहां धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक रहेगी।

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आज का राशिफल

व्ययाधिक्य का अवसर आ सकता है। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। बुद्घितत्व की सक्रियता से अल्प लाभ का हर्ष होगा। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। रुका हुआ लाभ आज प्राप्त हो सकता है। धार्मिक स्थलों की यात्रा का योग। शुभांक-4-6-8

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